Gujarat: गुजरात के नडाबेट में भी दिखेगा वाघा बॉर्डर जैसा शौर्य, नडाबेट व्यूप्वाइंट का अमित शाह ने किया उद्‌घाटन

10 Apr, 2022
Deepa Rawat
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के बनासकांठा जिले के नडाबेट में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर व्यूप्वाइंट (दर्शनीय स्थल) का उद्घाटन किया. नडाबेट भारत और पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित है.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के बनासकांठा जिले के नडाबेट में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर व्यूप्वाइंट (दर्शनीय स्थल) का उद्घाटन किया. नडाबेट भारत और पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित है, गृहमंत्री शाह का मानना है कि दर्शनीय स्थल की वजह से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. यह गुजरात का दूसरा ऐसा बॉर्डर प्वाइंट होगा, जहां बाघा बॉर्डर की तरह दर्शक दीर्घा, फोटो गैलरी और हथियारों-टैंकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा. 

गृहमंत्री अमित शाह ने नडाबेट व्यूप्वाइंट का किया उद्घाटन

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गौरतलब है कि नडाबेट में सिर्फ बीएसएफ के जवान ही प्रदर्शन कर सकेंगे. यहां बाघा बॉर्डर की तरह रिट्रीट सेरेमनी नहीं होगी. यानी इस कार्यक्रम में पाकिस्तान की सेना शामिल नहीं होगी. आपको बता दें कि नडाबेट का प्वाइंट भारत-पाक सीमा से 20-25 किलोमीटर की दूरी से पहले बनाया गया है. नडाबेट अहमदाबाद से लगभग 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

कहाँ जा रहा है कि यहां पर बीएसएफ जवानों के रहन-सहन, कर्तव्य पर तैनात तथा देश की सेवा में उनके योगदान को करीब देखा जा सकेगा. अमित शाह दोपहर में गांधीनगर में त्रिभुवन दास पटेल सहकार भवन का उद्घाटन करेंगे. गुजरात के बनासकांठा जिले से लगती भारत-पाक सीमा पर नडाबेट को राज्य सरकार ने पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है.

नडाबेट व्यूप्वाइंट

सीमा दर्शन प्रोजेक्ट का उद्घाटन अमित शाह रविवार सुबह 11 बजे कर दिया है. राज्य सरकार ने 125 करोड़ की लागत से यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध भी कराई हैं. बार्डर ट्यूरिज्म के विकास के लिए टी जंक्शन, जीरो पाइंट तक के रास्ते को विकसित किया गया है. सरकार ने यहां 500 लोगों की बैठक क्षमता वाला वातानुकूलित सभागार, सरहदगाथा म्यूजियम, सोलर ट्री, सोलर रूफटाप जैसी कई सुविधाओं को विकसित किया है.

माना जा रहा है कि आज से 50 साल पहले 1971 में जब भारत-पाक युद्ध हुआ था, जिसके बाद बांग्लादेश की मुक्ति हुई और साथ ही वह अस्तित्व में आया. उसके बाद 16 दिसंबर 1971 से लगातार हर वर्ष पाकिस्तान पर भारत की जीत के इस मौके को स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जाता रहा है. इसके अलावा यहां नाम, नमक, निशान के नाम से आर्ट गैलरी बनाई गई है. इसमें 100 तरह की प्रदर्शनी हैं. जिसमें ऑडियो-विसुअल एक्स्पेरिंस जोन में अतिथि 1971 के भारत-पाक युद्ध के गौरवशाली अतीत की एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री देख सकते हैं. यहां एक मॉडर्न 360-डिग्री बूथ एक्सपीरियंस जोन भी है, जहां “सैंड स्क्रीन” पर प्रोजेक्शन का अपने आप में एक अलग ही अनुभव होगा.

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