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अगले 10-15 वर्षों तक इलेक्ट्रिक वाहन लाना मुमकिन नही: मारुति प्रमुख आरसी भार्गव

16 Mar, 2022
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MarutiSuzuki: कंपनी की 2025 से पहले इलेक्ट्रिक कार लॉन्च करने की कोई योजना नहीं है.

नई दिल्ली: भारत जैसे देश में, जहां प्रति व्यक्ति आय यूरोप और अमेरिका के आय का केवल एक अंश है और कोयला बिजली का प्रमुख स्रोत है, कार्बन इमिसन की वजह से इलेक्ट्रिक वाहन अगले 10-15 वर्षों तक लाना नामुमकिन है। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने मंगलवार को यह बात कही।

इसलिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG), बायो-सीएनजी, इथेनॉल और हाइब्रिड वाहनों जैसी वैकल्पिक तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए, उन्होंने ET Auto EV Conclave 2022 के दौरान कहा। सीएनजी, बायो-सीएनजी, इथेनॉल और हाइब्रिड पर चलने वाली कारें कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करती हैं और भारत को अपने ईंधन आयात बिल को भी कम करने में मदद कर सकती हैं। 

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भार्गव ने सीएनजी से चलने वाली कारों पर अधिक प्रदूषण वाली पेट्रोल और डीजल कारों के समान कर लगाने के सरकार के औचित्य पर सवाल उठाया। भारत में वाहन पर 28% के उच्चतम कर स्लैब लगता है और उसके ऊपर अतिरिक्त उपकर भी लगते हैं। इस बीच, इलेक्ट्रिक कारों पर 5% जीएसटी लगता है।
उन्होंने सीएनजी और हाइब्रिड वाहनों के लिए कम कराधान और देश में कृषि कचरे से बायो-सीएनजी के उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने 'कार्बन नकारात्मक' कहा। उन्होंने कहा, "अगर हम उन रणनीतियों को अपनाते हैं जो वे (अमेरिका और यूरोप) अपना रहे हैं, तो मुझे नहीं लगता कि हम भारत में जो करने की जरूरत है, उसके साथ न्याय करेंगे।"
मालूम हो, मारुति सुजुकी लंबे समय से सीएनजी और हाइब्रिड कारों की प्रस्तावक रही है। कंपनी की 2025 से पहले एक इलेक्ट्रिक कार लॉन्च करने की कोई योजना नहीं है। भार्गव ने तर्क दिया कि भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय यूरोपीय लोगों की तुलना में केवल 5% और अमेरिकियों की 3% है और इस प्रकार भारत में व्यक्तिगत परिवहन की सामर्थ्य बहुत कम है। इसलिए ज्यादा भारतीय स्कूटर और मोटरसाइकिल और छोटी कारों को तरजीह देते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन इसकी तुलना में काफी महंगे होते हैं।
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