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हिंदु पक्ष की कार्बन डेंटिग की मांग को कोर्ट ने किया खारिज, कहा- कार्बन डेटिंग से शिवलिंग को पहुंच सकता है नुकसान

14 Oct, 2022
देशहित
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शुक्रवार दोपहर ढाई बजे इस मामले की अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो दोनों ही पक्षों के लोग अदालत में मौजूद रहे। वहीं दोपहर बाद कार्बन डेटिंग की मांग को अदालत ने अपने फैसले में खारिज करते हुए कहा कि इससे शिवलिंग को क्षति पहुंच सकती है।

नई दिल्ली: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष को बड़ा झटका लगा है। जी हां, मस्जिद में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक जांच की मांग को वाराणसी कोर्ट ने खारिज कर दिया है। आपको बता दें, हिंदू पक्ष ने कार्बन डेटिंग की मांग की थी लेकिन कार्बन डेटिंग के कारण शिवलिंग को नुकसान पहुंच सकता है। इसके चलते कोर्ट ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग को खारिज कर दिया है। वहीं इस पर वादी पक्ष के अधिवक्‍ता विष्‍णु जैन ने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर इसे चैलेंज करेंगे। हम अभी तिथि नहीं बता सकते लेकिन जल्द ही इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट जाकर इस पर वहां चैलेंज किया जाएगा।

मस्जिद में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक जांच की मांग को  वाराणसी कोर्ट ने खारिज किया

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शिवलिंग को नुकसान होने की संभावना के कारण जांच की मांग को किया गया खारिज

शुक्रवार दोपहर ढाई बजे इस मामले की अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो दोनों ही पक्षों के लोग अदालत में मौजूद रहे। वहीं दोपहर बाद कार्बन डेटिंग की मांग को अदालत ने अपने फैसले में खारिज करते हुए कहा कि इससे शिवलिंग को क्षति पहुंच सकती है। लोगों की आस्‍था को देखते हुए शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की जांच करने की अनुमति नही दी जा सकती है। पूर्व में वजूखाने में मिले शिवलिंग को अदालत ने सुरक्षित रखते हुए यहां पर हर प्रकार की गतिविधि पर रोक लगा दी थी। ऐसे में अदालत ने पूर्व के फैसले को दोहराते हुए जन भावनाओं का ख्‍याल रखते हुए शिवलिंग की यथा स्थिति बरकरार रखने की बात कही है।

हिंदू पक्ष ने की थी कार्बन डेटिंग की मांग

वाराणसीः ज्ञानवापी में मिले 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग होगी या नहीं? थोड़ी  देर में आएगा कोर्ट का फैसला - varanasi gyanvapi masjid verdict on carbon  dating of alleged ...

आपको बताी दें, हिंदू पक्ष की 4 वादी महिलाओं ने याचिका दायर कर कार्बन डेटिंग कराने की मांग की थी। हालांकि, श्रृंगौरी में पूजा की अनुमति को लेकर दायर केस पर सुनवाई जारी रहेगी। गौरतलब है कि इसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग के आयु निर्धारण के लिए की जा रही कार्बन डेटिंग या पुरातत्वविदों की टीम द्वारा इसकी और आसपास के स्थान की जांच की मांग की गई थी। शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग जहां हिंदू पक्ष ने की थी वहीं कार्बन डेटिंग का मुस्लिम पक्ष विरोध कर रहा था।

ये है पूरा मामला

अगस्त 2021 में 5 महिलाओं ने श्रृंगार गौरी में पूजन और विग्रहों की सुरक्षा को लेकर याचिका डाली थी। इस पर सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी का सर्वे कराने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला। जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि ये एक फव्वारा है। इसके बाद हिंदू पक्ष ने विवादित स्थल को सील करने की मांग की थी।सेशन कोर्ट ने इसे सील करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। SC ने केस जिला जज को ट्रांसफर कर इस वाद की पोषणीयता पर नियमित सुनवाई कर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था। जिला जज ने पूजा की मांग वाली याचिका को सुनवाई योग्य माना था।

क्या होती है कार्बन डेटिंग? 

कार्बन डेटिंग से लकड़ी, चारकोल, पुरातात्विक खोज, हड्डी, चमड़े, बाल और खून के अवशेष की उम्र पता चल सकती है। कार्बन डेटिंग से लेकिन एक अनुमानित उम्र ही पता चलती है, सटीक उम्र का पता लगाना मुश्किल होता है। पत्थर और धातु की डेटिंग नहीं की जा सकती, लेकिन बर्तनों की डेटिंग हो सकती है। अगर पत्थर में किसी प्रकार का कार्बनिक पदार्थ मिलता है तो उससे एक अनुमानित उम्र का पता किया जा सकता है।

Edited by deshhit news

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