4 लाख लोगों की नाराजगी क्यों मोल लेना चाहती है सरकार

23 Jan, 2024
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हिमाचल। हिमालयन गद्दी यूनियन हिमाचल प्रदेश ने अपनी लंबित मांग गद्दी समुदाय के साथ गद्दी शब्द जोडऩे को जोर-शोर से उठाई है। प्रदेशाध्यक्ष मोहिंद्र सिंह ने कहा कि गद्दी शब्द को समुदाय की छह वंचित उपजातियों के साथ जोडऩे की लगातार सरकार से मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक इस मुद्दे का हल नहीं हो पाया है। अध्यक्ष ने कहा कि अब हिमालयन गद्दी यूनियन अब अपनी मांग को उठाने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों, आपदा में मदद सहित संस्कृति व राज्य को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।

जिसमें कोविड-19, आपदा सहित अन्य मामलों में लगातार लाखों रुपए की आर्थिक मदद व सभी प्रकार से स्वयंसेवी के रूप में भी मदद प्रदान कर रही है। बावजूद इसके सरकार की ओर से आखिर क्यों बार-बार अनदेखी की जा रही है। मोहिंद्र सिंह ने कहा प्रदेश में कुछ अधिकारी लगातार गद्दी समुदाय में होते हुए गद्दी शब्द को हटाने की त्रुटि को दरूस्त करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय में 70 फीसदी आवादी होने के बावजूद धोखे में रखा जा रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि ट्राईबल को लेकर हमारी मांग नहीं है, मात्र अब मान-सम्मान के लिए ही गद्दी शब्द की जरूरत है। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि लोस चुनावों को लेकर भी अब वोट के लिए प्रयोग किया जा रहा है।

सरकार के निर्देशों के तहत छह बार गद्दी होने को लेकर रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है, जिसमें कांगड़ा-चंबा में रहने वाली उपजातियों जिसमें मुख्य रूप से छह जातियां सिप्पी, हाली, धोगरी, वाड़ी, लौहार व रिहाड़े शामिल हैं, जिसमें कुछ फीसदी लोगों को शामिल किया गया है, जबकि कुछेक वंचित लोगों को शामिल किया जाना है। जिलाधीशों की रिपोर्ट के तहत हर बार रिपोर्ट में उपजातियों को गद्दी पाया गया है। सरकार से गद्दी शब्द जोडऩे की सिफारिश की है। इतना ही नहीं, सचिवालय के सचिव स्तर के अधिकारी की ओर से भी जांच की गई है, लेकिन सही रिपोर्ट को सामने नहीं रखा जा रहा है। प्रदेशाध्यक्ष मोहिंद्र सिंह ने कहा कि पांच-पांच बार जांच पड़ताल की जा चुकी है। बावजूद इसके अब चार लाख से अधिक लोगों को नाराज किए जाने का खामियाजा सरकार को भुगतान करना पड़ेगा। इस विषय को लेकर प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मांग उठाई गई है, लेकिन अब तक कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही इस विषय पर उचित कदम न उठाने पर अब बड़ा जन आंदोलन करने के लिए मजबूर पड़ेगा।

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