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Varanasi: रिपोर्ट में हुआ खुलासा, भोले की नगरी काशी में गंगा जल को लेकर चौंकाने वाला सच आया सामने जान कर हो जायेंगे हैरान

29 Jul, 2022
Employee
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varanasi ganga

एक रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी में गंगा के पानी में हानिकारक तत्वों की मात्रा मानक से लाखों गुना अधिक पाई गई है. यानी जो पदार्थ 500 से कम होना चाहिए, वह लगभग 6 करोड़ के आसपास तक है. प्रदूषण बोर्ड का कहना है कि नाले बंद किए जाने के बाद भी ऐसी स्थिति बड़ा सवाल खड़ा करती है.

वाराणसी:  डुबकी तो छोड़िए, पूजा-अर्चना करने लायक भी नहीं है गंगा का पानी. मोक्षदायिनी गंगा का जल निर्मल नहीं है. जी हां भोले की नगरी काशी में गंगा जल को लेकर चौंकाने वाला सच सामने आया है. संकट मोचन फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी में गंगा का जल नहाने लायक भी नहीं है. वाराणसी में आठ स्थानों से लिए सैम्पल्स के बाद फाउंडेशन ने ये रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में गंगा जल में फेकल कोलीफॉर्म मानक से कई गुना अधिक पाया गया है. जो उन लोगों के लिए चिंताजनक है, जो गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं.

Varanasi Ganga Ghat

आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) के प्रोफेसर और फॉउंडेशन के अध्यक्ष विशंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि गंगा में सीधे गिरने वाले कई नाले बंद तो जरूर हुए हैं, लेकिन कहीं न कहीं उसका पानी गंगा में आ रहा है. अस्सी और वरुणा से बड़ी मात्रा में सीवेज का पानी गंगा में जा रहा है, जिसके कारण वहां फेकल कोलीफॉर्म करोड़ों में है.

sankat mochan FOundation Swachh Ganga

पूजा-पाठ और नहाने योग्य नहीं है वाराणसी का गंगा जल

Varanasi Ganga Ghat

आपको बताते चलें कि नहाने के पानी में फेकल कोलीफॉर्म 100 मिलीलीटर में 500 से कम होना चाहिए.लेकिन गंगा में जहां अस्सी मिलती है, वहां 3 करोड़ 10 लाख और डाउन स्ट्रीम में जहां वरुणा मिलती है, वहां 6 करोड़ के करीब है. 14 जुलाई की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आये है. इसके अलावा तुलसीदास पर 65 हजार, शिवाला घाट पर 35 हजार, राजेन्द्र प्रसाद घाट पर 21 हजार और ललिता घाट पर 16 हजार है. जो साफ दर्शाता है कि गंगा जल में बड़ी मात्रा में सीवेज का पानी है. ऐसे में गंगा जल नहाने लायक तो दूर आचमन लायक भी नहीं है, लेकिन फिर भी श्रद्धा है कि लोग गंगा में स्नान कर रहे हैं.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किया बड़ा दावा

Sankat Mochan Foundation

संकट मोचन फॉउंडेशन के आंकड़ों से यदि बात उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की करें तो उनके क्षेत्रीय अध्यक्ष कालिका सिंह का कहना है कि गंगाजल की सेहत में बीते 7 सालों में काफी सुधार हुआ है. वाराणसी के दीनापुर, रमना, गोइठहां और रामनगर एसटीपी प्लांट में करीब हर रोज 300 एमएलडी सीवेज जल का ट्रीटमेंट किया जाता है. वाराणसी में गंगा में मिलने वाले 23 नालों में से 19 को पूरी तरह बंद कराया जा चुका है. बाकी नालों के टेपिंग के लिए भी काम जारी है, लेकिन यदि नाले बन्द हो गए हैं तो फिर गंगा जल वाराणसी में नहाने योग्य क्यों नहीं है ये एक बड़ा सवाल पैदा करता है.

Edited By – Deshhit News

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