Punjab election 2022 : पंजाब में विधानसभा सीटों के लिए राजनैतिक वार

16 Feb, 2022
Deepa Rawat
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20 फरवरी से पंजाब में विधानसभा सीटों पर चुनाव शुरू हो रहें हैं
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जैसे की 20 फरवरी से पंजाब में विधानसभा सीटों पर चुनाव शुरू हो रहें हैं, सूबे की राजनीति में बयानबाजी भी तेज हो गई है बताते चलें, पंजाब के 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इसीके साथ, नेताओं के एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी अब तेज हो गया है।

पंजाब CM चरणजीत सिंह चन्नी ने राज्य में मतदाताओं को लुभाने के लिए छेड़ा विवाद

इन सबके बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने राज्य में मतदाताओं को लुभाने के लिए विवाद छेड़ दिया है। चुनाव से पहले ही एक रैली के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यूपी और बिहार के भैया को पंजाब राज्य में नहीं आने दिया जाएगा। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, जो उस रैली में शामिल थी, मुश्कुराते हुए सीएम द्वारा की गई इस घोषणा पर सराहना की ।

बीजेपी ने अब इसपर पलटवार करते हुए इसे उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता का अपमान बताया और कहा की, ‘पंजाब में शांति के लिए बीजेपी जरूरी है’ उन्होंने  कहा कि पंजाब के लोगों ने भाजपा जैसी अनुभवी पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना लिया है। उन्होंने कांग्रेस पर 2016 के पठानकोट हमले के दौरान शहीद हुए सैनिकों के बलिदान का अपमान करने का भी आरोप लगाया। बता दें, भाजपा पंजाब में अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस (PLC) और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने जा रही है। 

चुनावी माहौल में तमाम पार्टियों के नेता एक दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं।

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल बुधवार को जालंधर में तीन स्थानों पर पार्टी के लिए प्रचार किया और लोगों को अपने पार्टी का उद्देश्य बताया। इतना ही नही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ साथ आम आदमी पार्टी (आप) ने भी चन्नी की ‘उत्तर प्रदेश और बिहार’ वाली टिप्पणी पर कांग्रेस को फटकार लगाई ।

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मालूम हो, पंजाब में बीजेपी 65 सीटों पर, पीएलसी 37 सीटों पर और शिअद (एस) 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

पंजाब विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक की कुल आबादी 32 प्रतिशत है

बात करें पंजाब में राजनैतिक पक्षों की तो दलित मतदाता सभी राजनीतिक दलों के लिए मूल्यवान हैं और इस विधानसभा चुनाव में दलित पंजाब की राजनीति के केंद्र में हैं वे पंजाब की कुल आबादी का 32 प्रतिशत हैं, जो भारत में सबसे अधिक है। यही वजह है की राजनीतिक दलों के राजनेता उन्के समर्थन के लिए हरेक मुमकिन कोशिश कर रहे हैं क्यूंकि एक वोट बैंक के रूप में उनके अस्तित्व को नजरअंदाज करना बेवकूफी शाबित हो सकती है।

बात 2017 की पंजाब चुनाव की करें तो, कांग्रेस 77 सीटों के साथ सत्ता में आई, जबकि AAP ने आश्चर्यजनक रूप से 20 सीटें ही जीतीं वहीं, सत्ता से बेदखल, शिरोमणि अकाली दल ने 15 सीटें जीतीं और उसके तत्कालीन सहयोगी भाजपा ने तीन पर जीत हासिल की।

गौरतलब हो की पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं, जिसमें बहुमत के लिए 59 चाहिए होते हैं। पंजाब में 117 निर्वाचन क्षेत्र तीन क्षेत्रों में फैले हुए हैं – माझा (25 निर्वाचन क्षेत्र), दोआबा (23) और मालवा (69)।

पंजाब चुनाव की  वोटिंग 20 फरवरी को होगी और उसके नतीजे 10 मार्च (गुरुवार) को घोषित किए जाएंगे। हालाँकि पहले ये चुनाव 14 फरवरी को होने वाली थी परंतु चुनाव आयोग (ईसी) ने गुरु रविदास जयंती के मद्देनजर इसे 20 फरवरी तक के लिए टाल दिया ।

वैसे तो चुनाव के समय,सत्ता की लालच में,सभी पार्टियाँ बड़े बड़े वादें करती हैं पर अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किसके वादों पर ज्यादा भरोसा करते हैं।