उत्तराखंड के छह बच्चों ने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे जानकर हर कोई गर्व महसूस करेगा। किसी बच्चे ने भालू के हमले के दौरान हिम्मत दिखाई, तो किसी ने उफनती नदी में कूदकर दूसरे की जान बचाई। इन बच्चों के साहस को शुक्रवार को सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के परेड ग्राउंड में छह बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार प्रदान किए। सभी विजेताओं को पदक और प्रशस्ति पत्र के साथ 51-51 हजार रुपये की सम्मान राशि भी दी गई।
भालू के हमले में आरव को बचाने के लिए भिड़ीं दिव्या और दीपिका
चमोली के तीन बच्चों दिव्या, दीपिका और आरव सिंह को भालू के हमले के दौरान साहस दिखाने के लिए सम्मानित किया गया। 22 दिसंबर 2025 को जीआईसी यूपीएस हरिशंकर के विद्यालय परिसर में भालू घुस आया था। उसने कक्षा छह के छात्र आरव पर हमला कर दिया। इस दौरान दिव्या ने भालू का पीछा कर आरव को बचाने का प्रयास किया और उसे सुरक्षित पहुंचाने में मदद की। वहीं, दीपिका ने सूझबूझ दिखाते हुए नौ अन्य विद्यार्थियों को कक्षा सात के कमरे में पहुंचाकर सुरक्षित किया।
तेज बहाव में बह रही बच्ची को बचाने नदी में उतरी माया
चंपावत की माया ने 5 अगस्त 2025 को भारी बारिश के दौरान अदम्य साहस दिखाया। नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बालिका तेज बहाव में बहने लगी थी। माया ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने का प्रयास किया और सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान माया खुद भी घायल हो गई थीं। उनके इसी साहस के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
बादल फटने पर 17 लोगों को किया सतर्क
देहरादून की आराध्या ने 2 जून 2026 को बादल फटने की घटना के दौरान समझदारी दिखाई। अचानक मलबा और पानी आने पर उन्होंने घर में मौजूद 17 लोगों को खतरे से आगाह किया। उनकी सतर्कता से सभी लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंच सके। आराध्या ने तीन साल की बच्ची को भी पानी के तेज बहाव से बचाया।
बुजुर्ग की जान बचाने वाली श्वेता भी सम्मानित
टिहरी गढ़वाल की श्वेता ने 30 जनवरी 2025 को सड़क पर तेज रफ्तार से आ रहे वाहन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग को बचाया था। उन्होंने समय रहते बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क किनारे सुरक्षित पहुंचा दिया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार यह पुरस्कार दिए गए हैं। राज्यभर से प्राप्त आवेदनों में छह बच्चों का चयन किया गया। सरकार का उद्देश्य इन बच्चों के साहस को पहचान देना और अन्य बच्चों को भी मुश्किल परिस्थितियों में हिम्मत, जिम्मेदारी और सूझबूझ दिखाने के लिए प्रेरित करना है।