कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर 100 करोड़ रुपये का मानहानि का केस दर्ज, क्या है पूरा मामला ? जानें…

15 May, 2023
Deepa Rawat
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नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बजरंग दल पर दिए गए अपने बयान को लेकर अब फंसते दिख रहे हैं। दरअसल, संगरूर की एक अदालत ने मल्लिकार्जुन खरगे को मानहानि केस में समन भेजा है। बता दें कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ मानहानि का केस संगरूर में हिंदू सुरक्षा परिषद बजरंग दल हिंद के हितेश भारद्वाज ने किया था। यह मानहानि केस सौ करोड़ रुपये का है। आपको बता दें कि अगर आपके मान की हानि हुई है तो आप जितना चाहें तो उतनी मानहानि की राशि‍ क्‍लेम कर सकते हैं। आपको कितनी राशि मिलेगी? यह कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे- जिस पर आरोप लगाया गया है उसकी हैसियत कितनी है? दोनों पक्षों के बीच क्‍या बातें हुई, क्‍या वो मामला मानहानि का बनता है या नहीं और सबूतों को देखने के बाद।

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खरगे पर बजरंग दल पर अपमानजनक टिप्पणी करने का लगाया गया है आरोप

जानें- उस बजरंग दल की कहानी जिसे बैन करने का वादा कर रही है कांग्रेस -  bajrang dal controversy by congress manifesto ban Karnataka assembly  election 2023 bjp protest ntc - AajTak

हिंदु सुरक्षा परिषद बजरंग दल हिंद के संस्थापक हितेश भारद्वाज का आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बजरंग दल की तुलना देश विरोधी संगठनों से करते हुए मानहानि की है। हितेश ने कहा कि खरगे ने एक रैली में कहा था कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने पर बजरंग दल या अन्य देश विरोधी संगठन जो समाज में नफरत फैलने का काम करते हैं पर पाबंदी लगाई जाएगी। इसके विरोध में हितेश भारद्वाज ने संगरूर अदालत में मानहानि का केस दायर किया। केस पर सीनियर डिवीजन जज रमनदीप कौर ने मल्लिकार्जुन खरगे को समन जारी करते हुए 10 जुलाई 2023 को संगरूर अदालत में तलब किया है। यह जानकारी खुद हितेश भारद्वाज द्वारा दी गई। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को माननीय अदालत ने समन जारी किया है।

क्या है बजरंग दल ?

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बजरंग दल का गठन 8 अक्टूबर 1984 को हुआ। इस दल को बनाने का मकसद संतों की यात्रा को सुरक्षा देना था। इस हिंदूवादी संगठन के गठन का इतिहास अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा हुआ है। दरअसल, राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं में जागरूकता पैदा करने के लिए संतों की एक यात्रा निकाली जा रही थी। विश्व हिंदू परिषद के नेताओं को आशंका था कि संतों की इस यात्रा पर हमला हो सकता है। हिंदू वादी नेताओं ने उस समय की कांग्रेस सरकार से सुरक्षा की मांग की लेकिन राज्य सरकार ने संतों की यात्रा को सुरक्षा देने से इंकार कर दिया। बजरंग दल संगठन को शुरू करने के जिम्मेदारी हिंदू जागरण मंच के विनय कटियार को दी गई।

बजरंग दल किसके लिए करता है काम?

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‘बजरंग’ नाम हिन्दू राम भक्त हनुमान पर आधारित है। बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा है। इसका आधार देश के उत्तरी और मध्य भाग है। यह समूह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)की शाखाओं के समान लगभग 2,500 अखाड़े चलाता है। हिंदू विचारधारा, हिंदू संस्कृति का संरक्षण और हिंदू पहचान की सुरक्षा के लिए बजरंग दल काम करता है। यह संगठन कई बार विवादों में आया है। छह दिसंबर 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद इस संगठन पर प्रतिबंध भी लगा था। इस संगठन पर हिंसा और नैतिक पुलिसिंग के आरोप भी लगते हैं। बजरंग दल मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन भी चलाता है।

खरगे ने PFI से की थी बजरंग दल की तुलना

Why the NIA report on a PFI network within the Kerala police is a worry

बता दें कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बजरंग दल की तुलना (PFI) से की थी। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया या पीएफआई एक इस्लामिक संगठन है। ये संगठन अपने को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला बताता है। संगठन की स्थापना 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में हुई। संगठन की जड़े केरल के कालीकट में गहरी हैं। फिलहाल इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में बताया जाता है।

मुस्लिमों समुदाय के इर्द- गिर्द घूमती है PFI की गतिविधियां

Explained | What does the ban on PFI, affiliate organisations mean? |  Popular Front of India Ban | Explainer

एक मुस्लिम संगठन होने के कारण इस संगठन की ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों के इर्द- गिर्द ही घूमती हैं। कई ऐसे मौके ऐसे भी आए हैं, जब इस संगठन से जुड़े लोग मुस्लिम आरक्षण के लिए सड़कों पर आए हैं। संगठन 2006 में उस समय सुर्ख़ियों में आया था जब दिल्ली के रामलीला मैदान में इनकी तरफ से नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब लोगों की एक बड़ी संख्या ने इस कांफ्रेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। फिलहाल बताया जाता है कि इस संगठन की जड़े देश के 24 राज्यों में फैली हुई है। कहीं पर इसके सदस्य अधिक सक्रिय हैं तो कहीं पर कम। मगर मुस्लिम बहुल इलाकों में इनकी जड़े काफी गहरी हैं। संगठन खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है और मुस्लिमों के अलावा देश भर के दलितों, आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार के लिए समय समय पर मोर्चा खोलता है।

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