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सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमला, किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ बनी लेखक की जान पर बड़ा खतरा

13 Aug, 2022
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सलमान रुश्दी

उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर लेखक सलमान रुश्दी हमेशा ही विवादों में बने रहते हैं. और तो और इस किताब को लेकर उनको कट्टरपंथियों द्वारा हमेशा ही धमकियाँ मिलती रहीं हैं. और अब हाल ही में नेव्योर्क में एक मंच पर मौजूद सलमान रुश्दी पर चाक़ू से जानलेवा हमला हुआ जिसके बाद उनको वेंटीलेटर पर रखा गया है. इस पुरे मामले को लेकर ईरान काफी चर्चाओं में आ गया है. फ़िलहाल संधिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है.

नई दिल्ली: पहले भी मशहूर लेकर सलमान रुश्दी की किताब द सनैटिक वर्सेज पर काफी विवाद देखा गया था. काकी देशों में इनकी यह किताब बैन कर दी गई थी. केवल यही नहीं अपने इस उपन्यास को लेकर सलमान रुश्दी को हमेश ही धमकियों का सामना करना पड़ता रहा है. और अब उन पर जानलेवा हमले की खबर सामने आई है. सल्माम रुश्दी नेव्योर्क में एक भाषण के दौरान मंच पर मौजूद थे तभी अचानक उनपर जानलेवा हमला हुआ. घटना के बाद माहोल में अफरा तफरी मच गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहा है.

सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमला

घटना को लेकर ईरान चर्चाओं में

सलमान रुश्दी पर हुए इस हमले को लेकर ईरान भी सुर्खियों में आ गया. बताया जा रहा है कि इसकी नीव उस धमकी और फतवे से जुडी हैं जब सलमान रुश्दी का विवादित उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ प्रकाशित हुआ था. ईरान के मशहूर नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक फतवा जारी कर रुश्दी की मौत का आह्वान किया गया था. इस फतवे के बाद सलमान रुश्दी को नौ साल तक छिपकर रहना पड़ा था. हालाकिं, बाद में ईरान ने यह भी ख दिया था कि वह सलमान रुश्दी को मारने का समर्थन नहीं करता. लेकिन साल 2012 में ईरान के एक संगठन ने सलमान रुश्दी को मारने वाले के लिए इनाम राशि 3 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 3.3 मिलियन डॉलर करने का ऐलान कर दिया था.

उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’

अब सलमान रुश्दी पर हुए इस जानलेवा हमले को लेकर लोग ईरान की उस धमकी को याद कर रहे हैं और ईरान चर्चा में आता दिख रहा है. बताया जा रहा है कि हमले करने वाला 24 साल का युवा अमेरिका के न्यूजर्सी का ही रहने वाला है. फ़िलहाल तो संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है.

आखिर क्या है इस उपन्यास पर विवाद!

बता दें, सलमान रुश्दी के चौथे उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ की खरीद और बिक्री पर भारत समेत कई देशों में बैन है. सलमान रुश्दी के इस उपन्यास में पैगंबर मोहम्मद का अपमान किए जाने का आरोप लगाते हुए लोगों ने इसका काफी विरोध किया. कई देशों में विरोध-प्रदर्शन हुए और इस उपन्यास की प्रतियां भी फूंकी गई थी. अपने इस उपन्यास में सलमान रुश्दी ने मुस्लिम धर्म की एक परंपरा को लेकर लिखा है जिसकी वजह से पूरा विवाद बना हुआ है. ईरान नेता अयातुल्लाह खुमैनी ने सलमान रुश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया था. इसके अलावा रुश्दी के इस उपन्यास का जापानी भाषा में अनुवाद करने वाले हितोशी इगाराशी की हत्या हुई और तो और इटैलियन में अनुवाद करने वाले पर भी जानलेवा हमला हुआ. इस उपन्यास को लेकर रुश्दी को हमेशा ही जानलेवा धमकियाँ मिलती रही हैं.

‘द सैटेनिक वर्सेज’ का विरोध

बुकर प्राइज के विजेता रहे सलमान रुश्दी

सलमान रुश्दी

75 साल के सलमान रुश्दी अंग्रेजी भाषा के मशहूर लेखक हैं. वह भारतीय मूल के अंग्रेजी लेखक है. उनको उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ के लिए बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. बुकर पुरस्कार जीतने के बाद सलमान रुश्दी का ‘द सैटेनिक वर्सेज’ नाम से एक और उपन्यास आया जो उनका चौथा उपन्यास था. सलमान रुश्‍दी 1980 के दशक में अपनी पुस्‍तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर काफी विवादों में आए थे.

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