Haryana updates: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को सिरसा जिले में आयोजित होला मोहल्ला के समापन समारोह में शिरकत की। उन्होनें मस्तानगढ़ और जीवन नगर क्षेत्र में नामधारी समाज द्वारा आयोजित इस भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच कार्यक्रम को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री सैनी ने इस अवसर पर कहा कि इस ऐतिहासिक पर्व में शामिल होकर उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने इसे भारत की समृद्ध संस्कृति, साहस और परंपराओं का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि होला मोहल्ला केवल उत्सव नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने और साहस के साथ जीवन जीने का संदेश देता है।

‘आध्यात्मिकता और वीरता का संतुलन सिखाता है होला मोहल्ला’: CM सैनी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सैनी बोले कि जीवन में आध्यात्मिकता और वीरता दोनों का संतुलन अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यही संतुलन मनुष्य को मजबूत बनाता है और समाज को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “होला मोहल्ला हमें यह सिखाता है कि आध्यात्मिक मूल्यों के साथ-साथ साहस और पराक्रम भी जीवन का अहम हिस्सा हैं। जब ये दोनों एक साथ चलते हैं, तभी समाज और राष्ट्र मजबूत बनता है।”
नामधारी समाज के त्याग और बलिदान को CM सैनी ने किया नमन
मुख्यमंत्री ने आगे नामधारी समाज के गौरवशाली इतिहास की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज त्याग, समर्पण और बलिदान की महान परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत देश को उन वीर शहीदों पर गर्व है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए तोप के गोलों के सामने भी हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मुख्यमंत्री ने ऐसे सभी शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इसके साथ ही साथ उन्होंने आश्वासन दिया कि हरियाणा सरकार सामाजिक और धार्मिक कार्यों में नामधारी समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी।
महिला दिवस पर दिया सशक्तिकरण का संदेश, प्रेषित कीं शुभकामनाएं
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सैनी ने प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण समाज के विकास की आधारशिला है और सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
होला मोहल्ला सिख परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक पर्व
गौरतलब है कि होला मोहल्ला सिख परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसकी शुरुआत गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी। इस पर्व में घुड़सवारी, निशानेबाजी, मार्शल आर्ट्स और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से साहस और आध्यात्मिकता का प्रदर्शन किया जाता है। सिरसा के मस्तानगढ़ सहित कई स्थानों पर नामधारी समाज इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाता है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।