देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा भागीरथी में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की और पुण्य लाभ अर्जित किया गंगा दशहरा पर्व पर पूरा गंगोत्री धाम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया,
मोक्षदायिनी मां गंगा के धरा अवतरण दिवस गंगा दशहरा पर आज सुबह से ही गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और “हर-हर गंगे” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भागीरथी के पवित्र और शीतल जल में स्नान कर मां गंगा का पूजन किया।
ठीक 11 बजे गंगोत्री मंदिर से गंगा घाट तक राजा भगीरथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और जय गंगे, हर-हर गंगे” के उद्घोष से पूरा धाम भक्तिमय हो उठा।
सुरेश सेमवाल, सचिव, गंगोत्री मंदिर समिति
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए 1100 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुईं और गंगा दशहरा के दिन धरती पर अवतरित होकर मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। मान्यता है कि मां गंगा ने सबसे पहले गंगोत्री धाम में ही धरती को स्पर्श किया था।
इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण गंगा दशहरा के अवसर पर गंगोत्री धाम में राजा भगीरथ की शोभायात्रा निकाली जाती है।
गंगा दशहरा के पावन अवसर पर तीर्थ पुरोहित रविंद्र सेमवाल ने बताया कि आज ही के दिन राजा भगीरथ की तपस्या सफल हुई थी और मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। उन्होंने कहा कि इस दिन गंगा स्नान और पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं के पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गंगा दशहरा पर्व को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूरे दिन गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।