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US की “धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट” पर हिंदू संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा “इंडोफोबिक” और ‘हिंदूफोबिक’ है

28 Apr, 2022
Sachin
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इस रिपोर्ट में कहा है कि 2021 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति काफी खराब हुई थी. क्योंकि इस दौरान, भारत सरकार ने इस एजेंडे का प्रचार और प्रवर्तन को बढ़ाया, जिसमें बताया गया है कि हिंदू-राष्ट्रवादी एजेंडे को बढ़ावा देना शामिल है.

नई दिल्ली: वाशिंगटन के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग (USCIRF) की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट पर एक हिन्दू संगठन ने अपनी नाराजगी जताई है. इस रिपोर्ट को लेकर संगठन ने इसे “हिंदूफोबिक” आयोग के सदस्यों का काम बताया है. वहीं दूसरी ओर मुस्लिम और ईसाई संगठनों ने यूएससीआईआरएफ इस रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों पर सराहना व्यक्त की हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन को धार्मिक स्वतंत्रता के दर्जे के संबंध में भारत, चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और 11 अन्य देशों को ‘‘खासी चिंता वाले देशों” की सूची में डालने की सिफारिश की गयी है.

धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट” पर हिंदू संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

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हिंदूपैक्ट ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि यूएससीआईआरएफ को “इंडोफोबिक और हिंदूफोबिक सदस्यों” ने अपने नियंत्रण में ले लिया है. वहीं अमेरिकन मुस्लिम इंस्टीट्यूशन (एएमआई) और उसके कुछ सहयोगी संगठनों ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट पर सराहना करते हुए कहा कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2021 से और “ज्यादा खराब” हो गई है.

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट हुई प्रकाशित, भारत को चिंता की श्रेणी में डाला

इस रिपोर्ट में कहा है कि 2021 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति काफी खराब हुई थी. क्योंकि इस दौरान, भारत सरकार ने इस एजेंडे का प्रचार और प्रवर्तन को बढ़ाया, जिसमें बताया गया है कि हिंदू-राष्ट्रवादी एजेंडे को बढ़ावा देना शामिल है. इसके कारण भारत में मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है.

अमेरिका स्थित नीति अनुसंधान एवं जागरूकता संस्थान ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) के सदस्य खंडेराव कंड ने आरोप लगाया, ‘‘ यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट भारत के परिदृश्य में पक्षपातपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारत का नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) ऐसा कानून है जो उन शरणार्थियों को नागरिकता देता है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित रहे हैं, लेकिन यह मानने के बजाय इसका दुष्प्रचार कर लोगों के ज़ेहन में ये डाला गया कि उनकी नागरिकता छिनने वाली है.

कश्मीरी पंडितों की ओर भी ध्यान देना था

ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा’ (जीकेपीडी) के संस्थापक सदस्य जीवन जुत्शी ने कहा, ‘‘यह निराशाजनक बात है कि इस रिपोर्ट में केवल कश्मीर के मुसलमानों का हवाला दिया गया है लेकिन कश्मीरी पंडित हिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया गया, जो उनके आतंकवाद से हमेशा पीड़ित रहे हैं. इसमें यह जिक्र नहीं किया गया कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद स्थिति सामान्य हुई है.

ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा’ के संस्थापक सदस्य जीवन जुत्शी ने कहा की ये निराशाजनक है कि इस रिपोर्ट में कश्मीरी पंडितों की बात नहीं हुई

इस रिपोर्ट में किन देशों को चिंता वाला देश बताया

यूएससीआईआरएफ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में जिन अन्य देशों को इसके लिए वर्गीकृत करने की सिफारिश की है उनमें बर्मा, इरीट्रिया, ईरान, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, रूस, सऊदी अरब, सीरिया, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। यूएससीआरएफ ने पिछले साल भी अमेरिकी सरकार को इसी तरह की सिफारिश की थी जिसे बाइडन प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया था. भारत यूएससीआईआरएफ की रिपोर्टों को पूर्व में भी खारिज कर चुका है.

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