केंद्रीय इस्पात मंत्री ने एन.एम.डी.सी. लौह अयस्क खदान का दौरा किया और लौह अयस्कों की जांच एवं अवांछित पदार्थों के निष्कासन के संयंत्र की रखी आधारशिला

09 Jan, 2022
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केंद्रीय इस्पात मंत्री राम चंद्र प्रसाद सिंह ने आज कर्नाटक में एन.एम.डी.सी. की डोनिमलई लौह अयस्क खदान में 7.0 एम.टी.पी.ए. लौह अयस्कों की जांच एवं अवांछित पदार्थों के निष्कासन के संयंत्र की आधारशिला रखी।

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इस अवसर पर इस्पात मंत्री ने डोनिमलई और कुमारस्वामी लौह अयस्क खदानों तथा एन.एम.डी.सी. छर्रा निर्माण संयंत्र के संचालन की समीक्षा की। अधिकारियों को संबोधित करते हुए राम चंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि भारत में लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक – एन.एम.डी.सी. देश में बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं को लगातार पूरा करता रहा है। जिस तरह से भारत लोहा और इस्पात का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है, उसी तरह से हम स्टील विजन 2030 को प्राप्त करने के नजदीक पहुंच रहे हैं और एन.एम.डी.सी. इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान में जारी परियोजनाओं के निष्पादन और कार्य संचालन की कड़ी निगरानी किये जाने के भी निर्देश दिए ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सके।

आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में आज एन.एम.डी.सी. वृक्षारोपण अभियान का शुभारम्भ करते हुए इस्पात मंत्री ने हरित भारत के प्रति सबकी सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।राम चंद्र प्रसाद सिंह ने एन.एम.डी.सी. को उनके सभी खनन परिसरों के लिए 5 सितारा रेटिंग अर्जित करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र को पर्यावरण पर इसके प्रभाव के बारे में पूरी तरह से जागरूक होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सतत खनन प्रणालियां और संरक्षण पहल वर्तमान समय की आवश्यकताएं हैं और यह अत्यधिक गर्व की बात है कि एन.एम.डी.सी. पर्यावरण के प्रति अनुकूल खनन के लिए वचनबद्ध है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में एन.एम.डी.सी. डोनिमलई खदान से 7.0 एम.टी.पी.ए. लौह अयस्क की निकासी करता है जिसे एसपी-1 द्वारा प्रसंस्कृत किया जाता है। कुमारस्वामी लौह अयस्क खदान की क्षमता फिलहाल 7.0 एम.टी.पी.ए. है जिसे भविष्य में बढ़ाकर 10.0 एम.टी.पी.ए. तक किया जाएगा। कुमारस्वामी लौह अयस्क खदान से लौह अयस्क को प्रसंस्कृत करने के लिए 7.0 एम.टी.पी.ए. क्षमता के एसपी-2 स्क्रीनिंग प्लांट की स्थापना का कार्य प्रगति पर है और भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 10.0 एम.टी.पी.ए. करने का प्रावधान भी है। दोनों खदानों अर्थात के.आई.ओ.एम. और डोनिमलई से लौह अयस्क के प्रसंस्करण के लिए एसपी-2 के प्रावधान भी किए जा रहे हैं।

इससे पहले कंपनी की खदानों में केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देब ने इस वर्ष एन.एम.डी.सी. के उत्कृष्ट प्रदर्शन, इसकी विस्तार योजनाओं तथा पूंजीगत व्यय परिव्यय के बारे में जानकारी साझा की। देब ने उन्हें यह भी बताया कि किस तरह से ओडिशा और झारखंड में आरक्षित विकल्प के तहत खदानों का आवंटन एन.एम.डी.सी. को वर्ष 2030 तक 100 मीट्रिक टन लौह अयस्क खनन कंपनी बनने में सहायता कर सकता है।

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