विश्व प्रसिद्ध योग नगरी में देश-दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना कांच का झूला पुल यानी बजरंग सेतु अधिकारियों की सुस्ती और शासन की तारीख के फेर में फंस गया है।
पुल बनकर तैयार है, पीडब्ल्यूडी इसे आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर चुका है, जनता इस पर चल भी रही है, लेकिन इसका विधिवत लोकार्पण कब होगा इसका सबकों बेसब्री से इंतजार है।
हद तो यह है कि पुल को रात में चमकाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 5 करोड़ रुपये फूंककर शानदार लाइटिंग लगाई गई है, लेकिन लोकार्पण के इंतजार में वह लाइटें भी बंद पड़ी हैं।
इसका परिणाम यह है कि दिन ढलते ही पूरा बजरंग सेतु घने अंधेरे के आगोश में समा रहा है। तपोवन और स्वर्गाश्रम को जोड़ने वाले इस 132 मीटर लंबे पुल पर रात के समय सैलानी और स्थानीय लोग टॉर्च की रोशनी या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर रेंगने को मजबूर हैं।
पुल की सुरक्षा और पल-पल की निगरानी के लिए पीडब्ल्यूडी यांत्रिक विभाग ने भारी-भरकम खर्च कर 10 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं, लेकिन अंधेरे में ये कैमरे क्या रिकॉर्ड करेंगे यह बड़ा सवाल है। ऐसी स्थिति में रात के अंधेरे में पुल पर किसी भी वक्त पर्यटकों के साथ कोई आपराधिक वारदात या बड़ी दुर्घटना भी घट सकती है।
शायद प्रशासन इससे बेखबर है। इस मामले में अधिकारियों के बयान भी चौंकाने वाले हैं। PWD नरेंद्र नगर के अधिशासी अभियंता प्रवीण कर्णवाल का कहना है कि शासन स्तर से ही लोकार्पण से संबंधित दिन तय किया जाना है।
वही PWD यांत्रिक के अधिशासी अभियंता पंकज नयाल का कहना है कि टेस्टिंग के समय झूला पुल की लाइट जलाकर चेक की गई है। अभी विधिवत लोकार्पण नहीं हुआ है, इसलिए लाइट बंद है।