तसलीमा ने दो दिन पहले ही ट्विटर पर लिखा था कि आलोचना से ऊपर कोई नहीं हो सकता, कोई इंसान भी नहीं, कोई संत नहीं, कोई मसीहा नहीं, कोई पैगंबर नहीं, कोई भगवान नहीं. दुनिया को अगर हमको बेहतर बनाना है तो उसको आलोचना के लिए जगह देनी चाहिए.
नई दिल्ली: बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने नूपुर शर्मा के बयान के बाद हुए कई शहरों में हुए उग्र विरोध प्रदर्शन की कड़ी निंदा की है. साथ ही तसलीमा नसरीन ने पैगंबर मोहम्मद का जिक्र करते हुए हिंसक प्रदर्शन कर रहे लोगों को भी नसीहत दी है. बांग्लादेशी लेखिका ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर लिखा कि, अगर पैगंबर मोहम्मद आज जिंदा होते तो दुनिया भर में मुस्लिम कट्टरपंथियों का पागलपन देखकर चौंक जाते.
तसलीमा ने दो दिन पहले ही ट्विटर पर लिखा था कि आलोचना से ऊपर कोई नहीं हो सकता, कोई इंसान भी नहीं, कोई संत नहीं, कोई मसीहा नहीं, कोई पैगंबर नहीं, कोई भगवान नहीं. दुनिया को अगर हमको बेहतर बनाना है तो उसको आलोचना के लिए जगह देनी चाहिए. तसलीमा नसरीन अपनी किताब “लज्जा” की बांग्लादेश में कड़ी आलोचना के बाद लगभग तीन दशकों से निर्वासन में रह रही हैं.
बांग्लादेश तक पहुंचा विवाद, ढाका में निकाला गया विरोध मार्च
नुपुर शर्मा विवाद को लेकर अरब देशों समेत तमाम मुस्लिम देशों ने आपत्ति प्रकट की है. अब यह विवाद पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी पहुंच गया है. शुक्रवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हजारों लोगों ने विरोध मार्च निकाला. इसमें पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारेबाजी की गई और 16 जून को भारतीय दूतावास के घेराव और भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का भी एलान किया गया.
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जब छोड़ना पड़ा था तसलीमा को बांग्लादेश
कट्टरपंथी संगठनों से मौत की धमकी मिलने पर उन्हें साल 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. हालांकि तसलीमा के पास स्वीडिश नागरिकता है और वह पिछले दो दशकों में अमेरिका और यूरोप में रही हैं, लेकिन वह ज्यादातर समय से शॉर्ट रेजिडेंसी परमिट पर भारत में रह रही है. निलंबित भाजपा नेता नुपुर शर्मा और उनके निष्कासित सहयोगी नवीन कुमार जिंदल की टिप्पणी को लेकर कोलकाता के पास हावड़ा सहित कुछ शहरों में देश भर में प्रदर्शनों और कुछ शहरों में झड़पों के बाद दो लोग मारे गए और दर्जनों गिरफ्तार किए गए.