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अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा: भारत में मीडिया संस्थानों को डराने में शामिल रहे हैं सरकारी अधिकारी

13 Apr, 2022
Sachin
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अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि, पत्रकारों और एनजीओ से ऐसी खबरें मिली हैं कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी अधिकारियों से अलग-अलग तरीकों से प्रमुख मीडिया संस्थानों को डराने में शामिल रहे हैं जिसमें प्रायोजकों को निशाना बनाना, पत्रकारों पर मनगढ़ंत मुकदमे दर्ज करना और कुछ मामलों में मोबाइल टेलीफोन व इंटरनेट जैसी संचार सेवाएं बंद करना आदि शामिल है.

नई दिल्ली: भारत में राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों स्तरों पर सरकारी अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है मीडिया संस्थानों को डराने में. मानवाधिकारों को लेकर मंगलवार को जारी अमेरिकी रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

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अमेरिका के विदेश मंत्रालय के द्वारा जारी और कांग्रेस की मंजूरी प्राप्त ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज 2021 (Country Report on Human Rights Practices 2021)  की रिपोर्ट में भारत से संबंधित एक भाग में कहा गया है कि, स्वतंत्र मीडिया सक्रिय है और आम तौर पर विभिन्न प्रकार के विचार व्यक्त करता है.

कंट्री रिपोर्ट ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज 2021 हुई प्रकाशित

अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि, पत्रकारों और एनजीओ से ऐसी खबरें मिली हैं कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी अधिकारियों से अलग-अलग तरीकों से प्रमुख मीडिया संस्थानों को डराने में शामिल रहे हैं. इनमें सबसे पहले मालिकों पर दबाव बनाना, प्रायोजकों को निशाना बनाना, पत्रकारों पर मनगढ़ंत मुकदमे दर्ज करना और कुछ मामलों में मोबाइल टेलीफोन व इंटरनेट जैसी संचार सेवाएं बंद करना आदि शामिल है.

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारतीय मीडिया को डराने में सरकारी अधिकारियों का हाथ रहा है

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में गैर सरकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को डराने-धमकाने के लिए आपराधिक मुकदमे और जांच का इस्तेमाल किया गया. इसमें आगे कहा गया है कि जो ऑनलाइन मीडिया पोर्टल और वेबसाइट चल रहे हैं उन संस्थानों में केंद्र सरकार की एजेंसियों ने छापा मारे हैं और उन्हें विभिन तरीकों से प्रताड़ित करने की कोशिश में की गई हैं कई खोजी पत्रकारों पर तो हमले भी किए गये हैं.

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