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राजनीतिक दल समझते हैं कि न्यायपालिका उनके फैसलों का समर्थन करेगी, लेकिन वह सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी है : सीजेआई रमना

03 Jul, 2022
Sachin
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न्यायपालिका संविधान और सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी है. सीजेआई रमना ने इस बात को लेकर निराशा जताई कि आजादी के 75 साल बाद भी लोगों ने संविधान के द्वारा जो संस्थाएं स्थापित हुई हैं उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को नहीं समझा है.

नई दिल्ली: सीजेआई एन.वी. रमना ने शनिवार यानी 2 जुलाई को कहा कि भारत में कोई भी सत्ताधारी दल यह मानता है कि सरकार का हर कार्य न्यायिक मंजूरी पाने का हकदार है, जबकि दूसरी ओर विपक्षी दलों को यह उम्मीद होती है कि न्यायपालिका उनके राजनीतिक रुख और उद्देश्यों को ही आगे बढ़ाएगी लेकिन इस देश में ‘न्यायपालिका संविधान और सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी है. सीजेआई रमना ने इस बात को लेकर निराशा जताई कि आजादी के 75 साल बाद भी लोगों ने संविधान के द्वारा जो संस्थाएं स्थापित हुई हैं उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को नहीं समझा है.

न्यायपालिका, संविधान और सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी है: सीजेआई रमना

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उन्होंने आगे कहा कि, आम लोगों के बीच इस अज्ञानता को जोर-शोर से बढ़ावा दिये जाने से इन ताकतों को अधिक बल मिलता है, जिनका लक्ष्य एकमात्र स्वतंत्र संस्था यानी न्यायपालिका की ही आलोचना करना है. मुझे यह स्पष्ट करने दीजिए कि हम संविधान और सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी हैं. प्रधान न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि संविधान में उल्लेखित नियंत्रण और संतुलित व्यवस्था को लागू करने के लिए, हमें भारत में संवैधानिक संस्कृति को बढ़ावा देने और लोगों  के बीच जागरूकता की जरूरत है. लोकतंत्र भागीदारी करने की चीज है.    

समाज में सहिष्णुता और समावेशिता हो

सीजेआई रमना ने अपने भाषण में सहिष्णुता और समावेशिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, अमेरिकी समाज की सहिष्णुता और समावेशी प्रकृति है जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करने में सक्षम है, जो बदले में इसके विकास में योगदान दे रही है. अलग-अलग जाति, धर्म और नस्ल से योग्य प्रतिभाओं का सम्मान करना भी आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है. समावेशिता समाज एकता को मजबूत करता है जो शांति और प्रगति की कुंजी है. हमें इस पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है जो मुद्दे हमें एकजुट करते हैं, उन पर नहीं जो हमें बांटते हैं.

सीजेआई एन.वी रमना ने कहा कि समाज में सहिष्णुता और समावेशिता हो

दोनों देशों की पहचान विविधता की वजह से

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही विविधताओं से भरे देश हैं. इस विविधता को दुनिया के हर हिस्से में सम्मानित और पोषित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अमेरिका विविधता का सम्मान करता है, केवल इस वजह से वह कड़ी मेहनत और असाधारण कौशल के माध्यम से अपनी पहचान बनाने में सक्षम हुआ है.

Edited By: Deshhit News

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