मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार इन दिनों विपक्ष के हमलों से ज्यादा अपने ही मंत्रियों के विवादित बयानों और कार्यशैली को लेकर चर्चा में है। पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों के बयान और विवाद सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।
शीर्ष बैठक में हुआ मंत्रियों के कामकाज का आकलन
सूत्रों के अनुसार हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की समीक्षा के साथ मंत्रियों के प्रदर्शन, व्यवहार और सार्वजनिक छवि पर भी चर्चा की गई। माना जा रहा है कि संगठन और केंद्रीय नेतृत्व मंत्रियों से जुड़े विवादों पर नजर बनाए हुए है।
कई मंत्री रहे विवादों के केंद्र में
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिया गया बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। वहीं नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी कई बार अपने बयानों को लेकर आलोचना झेल चुके हैं। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के रेत माफिया संबंधी बयान ने भी राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था।
राज्यमंत्री और अन्य मंत्री भी घिरे
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का नाम जाति प्रमाण पत्र विवाद को लेकर सुर्खियों में है। दूसरी ओर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके के बीच हाल ही में सामने आए मतभेदों ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी निगाहें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों के कारण भाजपा संगठन मंत्रिमंडल में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर सकता है। यदि विस्तार होता है तो कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल प्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं।