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कौन है निख़त ज़रीन जो बनी 25 साल की उम्र में भारत की पांचवी महिला बॉक्सर जानिए

20 May, 2022
Employee
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Nikhat Zareen Boxer

भारतीय बॉक्सर निख़त ज़रीन ने गुरुवार को फ़्लाईवेट फ़ाइनल मुकाबले में थाईलैंड की जितपोंग जुतामास को हरा कर गोल्ड मेडल भारत के नाम किया.

देशहित न्यूज ड़ेस्क नई दिल्ली: महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के 52 किलो वर्ग का ये मुकाबला तुर्की के इस्तांबुल में हुआ. मैरी कॉम, सरिता देवी, जेनी आरएल और लेखा केसी के बाद निख़त ज़रीन पांचवीं भारतीय महिला मुक्केबाज़ हैं जिन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है. अपनी जीत के बाद मीडिया के साथ हुई एक वर्चुअल बातचीत में निख़त ने कहा, “ये जीत मेरे माता-पिता के लिए है. मैं जब भी अपनी मां को फ़ोन करती वो नमाज़ पढ़ कर आ रही होती थीं और मेरी जीत के लिए दुआ करती थीं.”

भारतीय बॉक्सर निख़त ज़रीन

“ये दुआ ऊपर वाले ने क़ुबूल की, ये जीत ये गोल्ड उनका है. सबको पता है कि मेरे पिता ने मुझे कितना सपोर्ट किया है. मेरी जीत मेरे माता-पिता को समर्पित है. जब मेरा बुरा वक़्त चल रहा था तो मेरे साथ कोई नहीं था, लेकिन मेरे माता-पिता, मेरा परिवार मेरे साथ था.” जब निख़त को एक पत्रकार ने बताया कि वह ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हैं तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, उन्होंने कहा, “क्या सच में मैं ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हूं, मेरा सपना रहा है कि एक दिन मैं ट्विटर पर ट्रेंड करूं और अगर मैं आज कर रही हूं तो ये जानकर मुझे बहुत खुशी हो रही है.”

भारतीय बॉक्सर निख़त ज़रीन

“जिस तरह की रुकावटें मेरे रास्ते में आईं उसने मुझे मज़बूत बनाया है. ख़ास कर मेरी चोट ने मुझे मानसिक तौर पर मज़बूत बनाया चाहे कुछ भी हो जाए मुझे रुकना नहीं है. फ़ाइनल डे के दिन जब मैं सुबह उठी तो ऊपर वाले को याद किया और आराम किया. पूरे दिन मैं फ़ाइनल में मेरे मूवमेंट कैसे होंगे उसके बारे में सोचती रही.”

‘रिश्तेदार ताने देते रहे, लेकिन हमें बेटी पर भरोसा था’

भारतीय बॉक्सर निख़त ज़रीन

अपनी बेटी की जीत पर निख़त की मां ने मीड़िया से बात करते हुए कहा, ”ये वो दिन है जिसका हम सभी को इंतज़ार था.” निखत की मां परवीन सुल्ताना ने कहा “हमें इंतज़ार था इस दिन का. ये हमारे परिवार के लिए बहुत बड़ा पल है. मेरी बेटी देश के लिए गोल्ड लेकर आई है. एक चैंपियन की परवरिश करना आसान नहीं था. कई ऐसे पल आए जब हमारे रिश्तेदार और दोस्तों ने हमारा, निकहत का मज़ाक बनाया लेकिन हमें भरोसा था निकहत पर और हम उसे सपोर्ट करते रहे. उसकी मेहनत का नतीजा सबके सामने हैं. “

निख़त के पिता मोहम्मद जमील अहमद बेटी की जीत पर कहते हैं, ” निख़त ने आज महिला विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीत कर पूरे देश को गौरवान्वित किया है. यह जीत उन सभी लाखों भारतीयों को समर्पित है जिन्होंने उसकी यात्रा के दौरान उसको सपोर्ट किया.”

पीएम मोदी ने भी दी जीत की बधाई

Pm मोदी ने किया ट्वीट

निखत की बहतरीन जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी निख़त को बधाई देते हुए ट्वीट किया, और कहा ” हमारे मुक्केबाजों ने हमें गौरवान्वित किया है! महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में शानदार स्वर्ण जीतने के लिए मैं निकहत ज़रीन को बधाई देता हूं, साथ ही इस प्रतियोगिता में मनीषा मौन और परवीन हुड्डा को भी कांस्य जीतने के लिए बहुत बधाई.”

बॉक्सिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने निख़त की जीत पर कहा, “विश्व स्तर पर मेडल जीतना हमेशा एक सपना होता है और निखत के लिए इसे इतनी जल्दी हासिल कर लेना बेहद सराहनीय है. बॉक्सिंग फ़ेडरेशन को गर्व है कि हमारे मुक्केबाजों ने ना केवल हम सभी को गौरवान्वित किया है, बल्कि उनकी बॉक्सिंग का सफ़र आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है.”

अपने हक के लिए मैरी कॉम से भी भिड़ी है निखत

25 साल की तेलंगाना से आने वाली निख़त ज़रीन, आज इस बात से बेहद खुश हैं कि वह ट्विटर पर ट्रेंड कर रही है. और ये ट्रेंड वो अपनी जीत के कारण कर रही हैं लेकिन 2019 में जब वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रही थी तो इसका कराण था उन्हें ट्रोल किया जाना. उन्होंने खेल मंत्री किरेन रिजीजू से 6 बार की विश्व विजेता रही मैरीकॉम के साथ एक मैच करने की मांग की थी. ये मैच टोक्यो ओलंपिक को क्वालीफ़ाई करने के लिए था.

भारतीय बॉक्सर निख़त ज़रीन

ये मैच हुआ और निख़त मैरीकॉम से 1-9 से हार गईं. इस मैच के बाद मैरी कॉम ने निख़त से हाथ तक नहीं मिलाया था. इस मैच में मिली करारी हार के बाद निख़त को Social Media पर काफी ट्रोल किया गया. वहीं इस साल मैरी कॉम वर्ल्ड चैंपियनशिप टूर्नामेंट में शामिल नहीं हो रही हैं. इस सही मौके को देखते हुए निखत ने ये शानदार जीत अपने नाम की और वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली भारत की पांचवी महिला बॉक्सर बन गईं.

भारतीय बॉक्सर निख़त ज़रीन

निखत ने 13 साल की उम्र से बॉक्सिंग शुरू की और छह महीने के भीतर साल 2010 में करीमनगर में स्टेट चैंपियनशिप का गोल्ड जीता, इसके तीन महीने के भीतर, निख़त को इरोड (तमिलनाडु) में सब-जूनियर का ‘सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज’ चुना गया. जल्द ही निख़त SAI (sports India authority) के कैंप में शामिल हो गईं.

आठ महीने के प्रशिक्षण के बाद साल 2011 में विश्व जूनियर और युवा चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता.

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