उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी का सम्मेलन।

28 Mar, 2026
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एस.जी.आर.आर. विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ऋषिकेश के सुप्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ और गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने आयुर्वेद फूड एंड न्यूट्रिशन फॉर लाइफस्टाइल विषय पर अपना प्रभावशाली व्याख्यान दिया।

अपने संबोधन में डॉ. श्रीवास्तव ने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान में मधुमेह उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियां महामारी की तरह बढ़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन रोगों की जड़ असंतुलित आहार, तनाव और प्रकृति-विरोधी जीवनशैली है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि आयुर्वेद में आहार केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि रोग-निवारण की प्रथम औषधि है। यदि व्यक्ति अपनी प्रकृति वात, पित्त, कफ के अनुसार आहार लेना शुरू कर दे, तो मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियाँ स्वतः नियंत्रित हो सकती हैं।

डॉ. श्रीवास्तव ने आयुर्वेदिक पोषण प्रणाली और आधुनिक पोषण विज्ञान के समन्वय पर बल देते हुए तीन मुख्य बिंदु साझा किए। सही पोषण शरीर के दोषों को संतुलित कर अंतःकरण को स्वस्थ रखता है। रोगों को जड़ से मिटाने के लिए आहार के साथ-साथ विहार व्यायाम, प्राणायाम उचित निद्रा और मानसिक संतुलन अनिवार्य है। आयुर्वेद का वैज्ञानिक पक्ष आज पूरी दुनिया के लिए जीवनशैली रोग नियंत्रण का एक प्रभावी मॉडल बन चुका है।

सम्मेलन का शुभारंभ डॉ. डी.के. श्रीवास्तव के साथ जर्मनी से आई लिया गार्डल, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत पांडे, भारतीय चिकित्सा परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती नर्वदा गोसाई, एम्स दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. रमेश लाल बिजलानी, डॉ. कंचन जोशी और डॉ. अनिल थपलियाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस सम्मेलन में जर्मनी, दुबई, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

वैश्विक विशेषज्ञों ने डॉ. श्रीवास्तव के विचारों की सराहना करते हुए स्वीकार किया कि आयुर्वेद का वैश्विक प्रचार समग्र स्वास्थ्य और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को एक नई दिशा प्रदान करेगा।