उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत में श्रीराम कथा के समापन समारोह को संबोधित करते हुए रामायण, श्रीराम और रामराज्य के महत्व पर अपनी बात रखी। नूरानपुर स्थित गोरक्ष पीठ आश्रम में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के समापन पर मुख्यमंत्री का करीब 38 मिनट का संबोधन सत्य, सनातन, श्रद्धा और आस्था पर केंद्रित रहा। इस दौरान उन्होंने कहा कि आस्था से सकारात्मकता आती है, जबकि अनास्था से तुष्टिकरण, आतंक और शोषण की भावना पैदा होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह लोगों को जीवन जीने की सीख भी देती है। रामायण के प्रसंगों से समाज में अच्छे विचार, संस्कार और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
रामकथा लोगों को जोड़ने का माध्यम
श्रीराम कथा के पांडाल में लिखे संदेश ‘राम गाओ, आनंद पाओ’ का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हजारों साल पुरानी धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को एक साथ जोड़ रही हैं। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग एक जगह एकत्र होकर कथा सुनते हैं। इसके पीछे उनकी श्रद्धा और आस्था की भावना है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा रखने वाले व्यक्ति को ही ज्ञान प्राप्त होता है। भारतीय परंपरा में शुभ कार्यों से पहले अखंड पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कराने की परंपरा भी इसी विश्वास से जुड़ी है।
अयोध्या के विकास का किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अयोध्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर रामलला के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। योगी ने वर्ष 2017 से पहले और अब की अयोध्या की व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कहा कि पहले वहां सड़कें संकरी थीं और रेल व हवाई संपर्क के पर्याप्त साधन नहीं थे। उन्होंने बताया कि अब अयोध्या को हवाई सेवाओं से जोड़ा गया है और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि को रामायण का रचयिता बताते हुए कहा कि दुनिया की कई भाषाओं में रामायण लिखी गई, लेकिन इसकी मूल परंपरा वाल्मीकि रामायण से जुड़ी है।
आस्था से आती है सकारात्मकता: CM योगी
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में काशी, मथुरा और वृंदावन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आस्था के कारण ही इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। काशी में हर दिन बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था समाज में सकारात्मकता का भाव पैदा करती है। इसके विपरीत अनास्था से तुष्टिकरण, आतंक और शोषण जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने धार्मिक आस्था को समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने वाला माध्यम बताया।
सबको सुरक्षा और योजनाओं का लाभ मिलना ही रामराज्य
मुख्यमंत्री ने रामराज्य की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ केवल धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि ऐसा शासन है जहां समाज के हर वर्ग को सुरक्षा मिले, सभी को समान अवसर प्राप्त हों और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्होंने प्रदेश में सुरक्षा, शिक्षा, समानता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की बात भी कही। योगी के मुताबिक, जहां भेदभाव और तुष्टिकरण के बजाय सभी के हितों का ध्यान रखा जाए, वही रामराज्य की भावना है।
संतों और श्रद्धालुओं का किया स्वागत
कार्यक्रम में काशी, अयोध्या और प्रदेश के अन्य जिलों से बड़ी संख्या में संत पहुंचे थे। आयोजन स्थल पर उनके बैठने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान सभी संतों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले बरेली दौरे के दौरान उन्हें गांव में श्रीराम कथा के आयोजन की जानकारी मिली थी। यहां पहुंचने पर बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखकर प्रसन्नता हुई। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ”वाणी को देता हूं विराम, जय-जय श्रीराम।” इसके साथ ही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के समापन कार्यक्रम में उनका संबोधन पूरा हुआ।