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BrahMos Missile: ब्रह्मोस का नाम सुनकर क्यों कांपते हैं दुश्मन… आखिर क्या खास है ब्रह्मोस मिसाईल में आईये आपको बताते है

24 Mar, 2022
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brahmos Missile

 रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 23 मार्च 2022 यानी बुधवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों में अंतर क्या है? (फोटोः DRDO)

बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइल में अंतर (Difference Between Ballistic Missile and Cruise Missile)

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नई दिल्ली: क्रूज मिसाइल (Cruise Missile) जेट इंजन से उड़ान के लिए ऊर्जा हासिल करती हैं. यह सबसोनिक गति से ही अपनी उड़ान भरती है. वहीं, बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) रॉकेट इंजन से पावर हासिल करती हैं. लेकिन सिर्फ शुरुआती उड़ान के समय ही. बैलिस्टिक मिसाइल को लॉन्च के बाद कुछ समय के लिए ही प्रोपेल किया जाता है. जबकि क्रूज मिसाइल सेल्फ प्रोपेल्ड होती है. वह टारगेट को हिट करने तक प्रोपेल होती रहती हैं. (फोटोः पीटीआई) 

वायुमंडल, गुरुत्वाकर्षण शक्ति और ट्रैजेक्टरी तय करती है सटीकता

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बैलिस्टिक मिसाइल वायुमंडल (Atmosphere) के बाहर जाकर वापस अंदर आती है और टारगेट पर गिरती हैं. जबकि, क्रूज मिसाइलें वायुमंडल के अंदर ही तैरते हुए टारगेट पर हमला करती हैं. ये कभी भी वायुमंडल के बाहर नहीं जातीं. बैलिस्टिक मिसाइल की सटीकता उसकी ट्रैजेक्टरी, गुरुत्वाकर्षण शक्ति, एयर रेजिसटेंस और कोरियोलिस फोर्स पर निर्भर करता है. जबकि, क्रूज मिसाइल की सटीकता उसे लगातार मिलने वाले प्रोपल्शन से तय होती है. (फोटोः विकिपीडिया)

किस तरह के हथियार ले जाती हैं दोनों मिसाइलें (Weapons on Missiles)

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बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) ज्यादा वजन के पेलोड यानी वॉरहेड ले जाने में सक्षम होते हैं. इनपर भारी परमाणु हथियार या कई वॉरहेड्स लगाए जा सकते हैं. लेकिन क्रूज मिसाइल (Cruise Missile) में इकलौता वॉरहेड जाता है. यह पारंपरिक हथियार होता है, जिससे सटीकता के साथ सीधा निशाना लगाया जाता है.

भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें (India’s Ballistic Missile)

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भारत में बैलिस्टिक मिसाइलों की काफी बड़ी रेंज है. जैसे- पृथ्वी-1, पृथ्वी-2, अग्नि-1, अग्नि-2, धनुष आदि. क्रूज मिसाइल के नाम पर सिर्फ ब्रह्मोस है. लेकिन ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे ताकतवर, घातक और तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. भविष्य में ब्रह्मोस-2 मिसाइल लाने की योजना है. यह हाइपरसोनिक मिसाइल होगी. इसमें स्क्रैमजेट इंजन लगाया जाएगा. इसकी रेंज अधिकतम 600 किलोमीटर होगी. लेकिन इसकी गति मैक-7 यानी 8,575 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान या जमीन पर लगाए गए लॉन्चपैड से दागा जा सकेगा. (फोटोः विकिपीडिया

क्रूज मिसाइलों के प्रकार (Types of Cruise Missile)

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 क्रूज मिसाइलें तीन प्रकार की होती हैं. पहली सबसोनिक (Subsonic) यानी 0.8 मैक की गति से चलने वाली. यानी ये 987 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ती है. दूसरी सुपरसोनिक (Supersonic) यानी मैक 2 से मैक 3 तक. ये 2469 किलोमीटर प्रतिघंटा से 3704 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार. तीसरी होती हैं- हाइपरसोनिक (Hypersonic) यानी मैक 5 या उससे ऊपर. इनकी गति 6100 किलोमीटर प्रतिघंटा या उससे ज्यादा हो सकती हैं. (फोटोः पीटीआई) बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रकार (Types of Ballistic Missile)

बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रकार (Types of Ballistic Missile)

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बैलिस्टिक मिसाइलों को चार प्रकार होते हैं. पहले शॉर्ट रेंज (टैक्टिकल) बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) इनकी रेंज 300 से 1000 किलोमीटर होती है. दूसरी मीडियम रेंज (थियेटर) बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM), इनकी रेंज 1000 से 3500 किलोमीटर होती है. तीसरी इंटरमीडियट रेंज (लॉन्ग रेंज) बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM or LRBM),  इनकी रेंज 3500 से 5500 किलोमीटर होती है. चौथी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), इनकी रेंज 5500 किलोमीटर से ज्यादा होती है. 

वायुसेना ने किया था ब्रह्मोस का सफल परीक्षण (Airforce BrahMos Missile)

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पिछले साल 8 दिसंबर 2021 वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमके-1 में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर वर्जन का सफल परीक्षण किया गया. मिसाइल ने तय मानकों को पूरा करते हुए दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया. सुखोई-30 एमके-1 (Sukhoi-30 MK-1) फाइटर जेट में लगाए गए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने तय मानकों को पूरा करते हुए दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया. सुखोई-30 एमके-1 (Sukhoi-30 MK-1) फाइटर जेट में लगाए गए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos Supersonic Cruise Missile) को पूरी तरह से देश में ही विकसित किया गया है. इसमें रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) तकनीक का उपयोग किया गया है. ताकि इसकी गति और सटीकता और ज्यादा घातक हो जाए. इससे पहले ब्रह्मोस मिसाइल के एयर वर्जन का सफल परीक्षण जुलाई 2021 में किया गया था. (फोटोः विकिपीडिया)

ब्रह्मोस मिसाइल का नौसैनिक वर्जन (Naval Version of BrahMos Missile)

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 समुद्र से दागने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल के चार वैरिएंट्स हैं. पहला- युद्धपोत से दागा जाने वाला एंटी-शिप वैरिएंट, दूसरा युद्धपोत से दागा जाने वाला लैंड-अटैक वैरिएंट. ये दोनों ही वैरिएंट भारतीय नौसेना में पहले से ऑपरेशनल हैं. तीसरा- पनडुब्बी से दागा जाने वाला एंटी-शिप वैरिएंट. सफल परीक्षण हो चुका है. चौथा- पनडुब्बी से दागा जाने वाला लैंड-अटैक वैरिएंट. (फोटोः गेटी)

किन युद्धपोतों पर तैनात है ब्रह्मोस मिसाइल (Indian Fleet With BrahMos Missile)

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भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने राजपूत क्लास डेस्ट्रॉयर INS Ranvir और INS Ranvijay में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों वाला लॉन्चर लगा रखा है. इसके अलावा तलवार क्लास फ्रिगेट INS Teg, INS Tarkash और INS Trikand में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों वाला लॉन्चर तैनात है. शिवालिक क्लास फ्रिगेट में भी ब्रह्मोस मिसाइल फिट है. कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर में भी यह तैनात है. INS Visakhapatnam में सफल परीक्षण हो चुका है. इसके बाद भारतीय नौसेना नीलगिरी क्लास फ्रिगेट में भी मिसाइल को तैनात करेगी. (फोटोः पीटीआई)

नौसैनिक ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत (Power of Naval BrahMos Missile)

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युद्धपोत से लॉन्च किए जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल 200 किलोग्राम वॉरहेड ले जा सकती है. यह मिसाइल मैक 3.5 तक की अधिकतम गति हासिल कर सकती है. यानी 4321 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार. इसमें दो स्टेज का प्रोप्लशन सिस्टम लगा है. पहला सॉलिड और दूसरा लिक्विड. दूसरा स्टेज रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) है. जो इसे सुपरसोनिक गति प्रदान करता है. साथ ही ईंधन की खपत कम करता है. (फोटोः DRDO)

दुश्मन की नजर में नहीं आती ब्रह्मोस मिसाइल

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ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही मार्ग बदलने में सक्षम है. चलते-फिरते टारगेट को भी ध्वस्त कर सकता है. यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं, यानी दुश्मन के राडार को धोखा देना इसे बखूबी आता है. सिर्फ राडार ही नहीं यह किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है.  इसको मार गिराना लगभग अंसभव है. ब्रह्मोस मिसाइल अमेरिका के टॉमहॉक मिसाइल की तुलना में दोगुनी अधिक तेजी से वार करती है.  यह मिसाइल 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है, जो किसी भी बड़े टारगेट को मिट्टी में मिला सकता है. (फोटोः गेटी)

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