आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व के बीच Edufiq की स्वाति गांगुली ने समझाया बच्चों को नयी शिक्षा का महत्व

25 May, 2022
Deepa Rawat
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अध्यापिका के तौर पर अपने करियर की शुरूआत करने वाली स्वाति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व के बीच एडुफिक-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्सवेयर की शुरूआत हुई है जिसे कक्षा 5वीं से 10वीं तक के छात्रों के संज्ञानात्मक कौशल को सुधारने के लिए डिज़ाइन किया गया है

देशहित न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: अपनी आकांक्षाओं को नई उड़ान देने के लिए हम सभी पंख फैलाते हैं, मगर दूसरों के जीवन को नई दिशा दिखाने की ज़िम्मेदारी कुछ ही लोग अपने कंधों पर लेते हैं और उन्हीं में से एक है स्वाति गांगुली। जो न केवल स्वंय आगे बढ़ी बल्कि ऐसे न जाने कितने लोगों को भी आगे बढ़ाया, जो जीवन में कई असर्मथताओं के चलते जिंदगी की दौड़ में पीछे रह गए थे।

अध्यापिका के तौर पर अपने करियर की शुरूआत करने वाली स्वाति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व के बीच एडुफिक-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्सवेयर की शुरूआत हुई है जिसे कक्षा 5वीं से 10वीं तक के छात्रों के संज्ञानात्मक कौशल को सुधारने के लिए डिज़ाइन किया गया है जिसका उपयोग नियमित अध्ययन के बोझ के बिना बच्चों को दक्ष बनाने के लिए किया जाता है।

रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल सहित बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के सीबीएसई स्कूलों के 25,000 छात्र इस शिक्षा में शामिल हैं।

कौन हैं स्वाति गांगूली, जिन्होंने बच्चो की पढाई को बनाया और आसान

स्वाति गांगुली

1989 में अध्यापिका के तौर पर अपने करियर की शुरूआत करने वाली स्वाति गांगुली ने शुरूआत में बच्चों को अंग्रेजी और सोशल स्टडीज की तालीम देनी शुरू की थी। कुछ वक्त बाद पति की पोस्टिंग मैसूर में होने की वजह से उन्होंने मैसूर के एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और अपनी मेहनत की बदौलत महज दो सालों में वहां प्रिंसिपल नियुक्त हो गईं। अब वे बच्चों के ओर भी करीब आ चुकी थी। बच्चों की हर छोटी से छोटी तकलीफ को समझने लगी थी। अब बच्चों की असर्मथता को दूर करने के लिए स्वाति ने सन 2007 में पीजीटी किया और वे अब बच्चों की डिसएबिलिटी को समझने लगी थीं और बच्चों की काउन्सलिंग करना शुरू किया।

साथ ही बाकी अध्यापको को भी इससे संबधित निर्देश दिए, ताकि बच्चों को समझा जा सके। फिर साल 2010 में स्वाति दिल्ली आ गई, मगर यहां आकर दोबारा से स्कूल में काम करने की बजाय अब उन्होंने घर से ही एक सेंटर चलाने की शुरूआत की। उसके बाद 2012 में बतौर एजुकेशन कंसलटेट एक कनेडियन कंपनी में सालभर टीचर्स को गाइड करने का काम किया। उसके बाद 2013 में अपने बिजनेस पार्टनर के साथ मिलकर जुआना टेक्नालाजी प्राइवेट लिमिटेड की बुनियाद रखी, जिसमें कई बड़े ब्रैंडस से जुड़ कर प्रशिक्षण देने का काम किया। वहीं साल 2019 में एडूफ़िक के ज़रिए ऑर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स से संबधित कोर्स चलाए।

इस पूरे सफर में स्वाति को अपने परिवार का भरपूर सहयोग मिला। स्वाति ने अपने सपनों को पूरा करने के साथ साथ अपने बच्चे की भी देखरेख की और घर परिवार को भी पूरा वक्त दिया। स्वाति के अथक प्रयासों के चलते दिल्ली में उनके दो सेंटर हैं। जहां वे स्लम के बच्चों को प्रशिक्षित करने का काम करते हैं। इसके अलावा वे ट्रांसजेनडर्स को भी सोसायटी से जोड़ने के लिए भी प्रयासरत हैं।

पिछले कुछ सालों से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भी स्कूली पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पाठ्यक्रम को शुरू करने पर जोर दिया है। शैक्षणिक वर्ष 2020-21 की शुरुआत में सीबीएसई ने देश के 200 स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम बनाने के लिए आईबीएम के साथ साझेदारी की है।

Edufiq क्या है ?

Edufiq दिल्ली से शूरू किया गया एक EDtech स्टार्टअप है जो खेल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा प्रदान करता है। इसमें कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आगामी पाठ्यक्रमों पर बच्चों को पढ़ाने और प्रशिक्षित करने के लिए उच्च प्रदर्शन वाली शैक्षणिक पृष्ठभूमि के प्रशिक्षक हैं। यह गेम-आधारित शिक्षा पद्धति V से VII और VIII से X क्लास के छात्रा को AI शिक्षा प्रदान करता है। इसमें AI की अवधारणाओं को Minecraft नामक गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से पढ़ाया जाता है। जबकि आठवीं, नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्रों को एडुफीक द्वारा विकसित ट्रेड-मार्क माइक्रोप्रोसेसर किट द्वारा सहायता प्राप्त अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से एआई की उन्नत अवधारणाएं सिखाई जाती हैं

यह मौजूदा शिक्षा प्रणाली छात्रों और शिक्षकों के बीच देशभर में काफी लोकप्रिय हुई है। यह गेम-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शिक्षा प्रदान करता है। यह विधि बच्चे की कल्पनाशक्ति को बढ़ाती है और सीखने की प्रक्रिया को मज़ेदार बनाती है। यह विधि बढ़ते बच्चों में रचनात्मकता, संचार कौशल, समस्या-समाधान, महत्वपूर्ण सोच, तार्किक तर्क और संज्ञानात्मक कौशल को भी बढ़ावा देती है।


स्कूलों में एआई शिक्षण को लेकर लगातार बढ़ती जरूरत को देखते हुए स्वाति गांगुली ने एडुफिक की शुरूआत की है। पिछले 25 सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली स्वाति गांगुली बताती हैं कि “शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इस पहल का उद्देश्य सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और छात्रों का एक समूह बनाना है जो स्कूलों में एआई शिक्षा को उत्प्रेरित कर सकें”

Edufiq द्वारा विकसित यह अनुभवात्मक मॉड्यूल ट्रेडमार्क माइक्रोप्रोसेसर किट द्वारा सहायता प्राप्त है। मॉड्यूल की सभी सामग्री को इंडियन सोसाइटी फ़ॉर टेक्निकल एजुकेशन एंड कंप्यूटर साइंस टीचर्स एसोसिएशन के मानकों के अनुसार मैप किया गया है।

बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस स्टार्टअप ने अब तक देश के 12 स्कूलों के साथ साझेदारी की है और साल के अंत तक इसे दोगुना करने की योजना है। एडुफिक के विस्तार के पहले चरण में रांची बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के सीबीएसई स्कूलों के 25,000 छात्र शामिल होंगे।

स्वाति आगे बताती हैं कि, “हमारे देश की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से अलग है। स्कूलों में छात्रों क्या पढ़ाया जाता है और छात्रों को नौकरी के लिए क्या चाहिए, स्कूल स्तर पर इसकी मैपिंग नहीं की जाती है। शिक्षार्थी को वैश्विक मानकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करना होगा। इसलिए हमें कुछ ऐसा करना होगा जो शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाट सके। ”

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