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Alt News के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत, रखी ये दो शर्तें, जानें

08 Jul, 2022
Sachin
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मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जुबैर के वकील ने, जुबैर की जान को खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से जमानत देने की अपील की. लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट में सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से जमानत याचिका को ख़ारिज करने कि अपील की थी.

नई दिल्ली: फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने जुबैर को अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया है. इतना ही नहीं, जुबैर की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने यूपी पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि इससे पहले हाईकोर्ट की तरफ से जुबैर की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया था. जिसके बाद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका की गुहार लगाई थी.  

कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जुबैर के वकील ने, जुबैर की जान को खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से जमानत देने की अपील की. लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट में सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से जमानत याचिका को ख़ारिज करने कि अपील की थी. उन्होंने कहा कि, जुबैर ने सिर्फ एक ट्वीट नहीं किया है, बल्कि उनकी ऐसे अपराध करने की आदत पुरानी आदत रही है. 

मो. जुबैर की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता में जमानत याचिका ख़ारिज करने की अपील की

और यह भी पढ़ें- कर्नाटक हाईकोर्ट के जज को मिली तबादले की धमकी, राहुल गांधी ने कहा- BJP संस्थानों को ध्वस्त करने में लगी है

सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि, 1 जून को एफआईआर दर्ज हुई और 10 जून को हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से मना किया. जिसके बाद उन्होंने बहुत से तथ्य छुपाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत की मांग की है. इस पर सुप्रीम कोर्ट के जज ने पूछा कि, क्या वह गिरफ्तार है? जवाब में सॉलिसीटर मेहता ने कहा कि, कोर्ट के आदेश से पुलिस हिरासत में है और यही सब तथ्य सुप्रीम कोर्ट से छुपाए गए. यह गंभीर मामला है. जुबैर की ओर से सीनियर वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि यूपी पुलिस की ओर से उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज एफआईआर से पता चलता है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है. गोंजाल्विस ने आगे कहा कि उनका काम समाचारों को सत्यापित करना है, और वह नफरत फैलाने वाले भाषणों की तथ्य-जांच करने की भूमिका निभाते रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने की सुनवाई

जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मोहम्मद जुबैर की याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने याचिका के आधार पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि जुबैर पुलिस कस्टडी में है और उसकी जमानत याचिका निचली अदालत से खारिज नहीं हुई है और उन्होंने पहले ही यहां याचिका कर दी है. इस पर जुबैर की ओर से कोलिन गोंजाल्विस ने कहा कि ये आरोप गलत है.

ऑल्ट न्यूज़ के सहसंस्थापक मोहम्मद जुबैर की सुनवाई जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी ने की

आजाद घूमते हैं नफरत फैलाने वाले-

ज़ुबैर के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि, हमें सीतापुर कोर्ट से ज़मानत खारिज होने का आदेश कल रात में ही मिल गया था लेकिन हमने तो हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें केस रद्द करने से मना कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि ज़मानत रद्द हो जाने को चुनौती देने का दूसरा कानूनी रास्ता है, यह नहीं है. इसके बाद गोंजाल्विस ने ज़ुबैर के ट्वीट्स का हवाला देकर बताया कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि, पुलिस ने हिरासत बेंगलुरु से फोन ज़ब्त करने के नाम पर दी गई है. जब मैं स्वीकार कर रहा हूं कि ट्वीट मैंने किया था, तो फोन ज़ब्त करने का सवाल क्यों उठना चाहिए. जिसने नफरत फैलाने वालों की जानकारी सामने लाई, वह जेल में है. नफरत फैलाने वाले आज़ाद घूम रहे हैं.

Edited By: Deshhit News

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