नईदिल्ली : आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में पंचायती राज वेबिनार श्रृंखला के हिस्से के रूप में, पंचायती राज मंत्रालय ने 25 अक्टूबर, 2021 को वर्चुअल माध्यम से पंचायती राज संस्थानों के साथ पारस्परिक संवाद के लिए एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। दिन भर चलने वाले राष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन सचिव, पंचायती राज मंत्रालय सुनील कुमार ने किया।

उद्घाटन सत्र के दौरान सुनील कुमार, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय, मोनीदीपा मुखर्जी, महानिदेशक, प्रकाशन विभाग, (डॉ.) चंद्रशेखर कुमार, अपर सचिव, पंचायती राज मंत्रालय और (डॉ.) बिजय कुमार बेहरा, आर्थिक सलाहकार, पंचायती राज मंत्रालय के द्वारा प्रकाशन विभाग, सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा योजनाओं और विकास से संबंधित मुद्दों पर प्रकाशित होने वाले प्रमुख मासिक सरकारी पत्रिका “योजना” का पंचायती राज विशेषांक जारी किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए प्रकाशन विभाग की महानिदेशक मोनीदीपा मुखर्जी ने कहा कि पंचायती राज पर योजना के इस विशेष संस्करण को प्रकाशित करना प्रकाशन विभाग के लिए बहुत गर्व की बात है, जिसके माध्यम से हम देश भर की कई पंचायतों की सफलता की कहानियों का प्रसार करेंगे।

सुनील कुमार, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय ने कहा कि योजना का यह विशेष संस्करण न केवल पंचायती राज पदाधिकारियों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगा, और शिक्षाविद, नीति योजनाकार, छात्र और प्रशासक भी पंचायती राज से संबंधित प्रमुख मुद्दों से जुड़ी बहुमूल्य जानकारियां पा सकते हैं।

अपने मुख्य भाषण में सुनील कुमार, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय वेबिनार की दिशा तय की। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि कर्नाटक राज्य ने पंचायत भवनों में सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापित करने के लिए नई पहल की है; पंजाब, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। पंचायत भवन में स्थापित सार्वजनिक पुस्तकालय ग्रामीण युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी एवं सार्थक सिद्ध होगा।
सचिव ने कहा कि पंचायतों को अब ओडीएफ प्लस और जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में लगातार काम करना होगा, ठोस कचरा प्रबंधन और गांवों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए ठोस रणनीति बनाकर गांवों में भी काम किया जाना चाहिये। टीकाकरण अभियान में पंचायतों की भूमिका की सराहना करते हुए, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय ने भविष्य में बच्चों के लिए कोविड-19 टीकाकरण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और आशा व्यक्त की कि बच्चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन की उपलब्धता से स्कूल और संबंधित गतिविधियों को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार अनुदान के रूप में 44,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गयी है। उन्होंने पंचायतों से राष्ट्रीय प्राथमिकता और स्थानीय मुद्दों को लेकर अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की।
कुमार ने कहा कि प्रधान मंत्री ने सितंबर 2020 में सभी सरपंचों को पत्र लिखकर “हर घर जल (हर घर के लिए पानी)” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम करने की अपील की थी और लोगों और ग्राम पंचायतों से जल जीवन मिशन को जन आंदोलन बनाने की अपील की थी। पंचायतें अपनी भूमिका के महत्व को इससे भी जान सकती हैं कि माननीय प्रधान मंत्री का 24 मार्च 2021 को जल संरक्षण आंदोलन “जल शक्ति अभियान: कैच द रेन” का पत्र भी सभी सरपंचों को संबोधित किया गया था।
4 तकनीकी सत्रों के दौरान, निम्नलिखित विषयों पर विचार विमर्श हुआ और अनुभव साझा किये गये: (i) जल जीवन मिशन और स्वच्छता में पंचायतों की भूमिका; (ii) स्वास्थ्य और कोविड-19 प्रबंधन और टीकाकरण में पंचायतों की भूमिका; (iii) पंचायतों द्वारा स्वयं के राजस्व (ओएसआर) में वृद्धि; और (iv) पंचायतों में ई-गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर।
विषयों का चयन केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण योजनाएं भी शामिल हैं, को तैयार करने, कार्यान्वयन और निगरानी और आय बढ़ाने जिससे राष्ट्र निर्माण में योगदान और गांव में जीवन जीना और आसान बनाना सुनिश्चित हो, में पंचायती राज संस्थानों की अहम भूमिका को देखते हुए किया गया था।
पंचायती राज मंत्रालय द्वारा उठाये गये कदमों और मंत्रालय के विचारों को संयुक्त सचिवों और आर्थिक सलाहकार, एमओपीआर द्वारा पावरप्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। मनोज कुमार साहू, निदेशक (जेजेएम), पेयजल और स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन में पंचायतों की भूमिका पर एक प्रस्तुति दी। विनय ठाकुर, मुख्य परिचालन अधिकारी, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी), इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने भी प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा किये। आबिद हुसैन सादिक, उपायुक्त, किन्नौर, हिमाचल प्रदेश, डॉ. रवि मित्तल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद रायगढ़, छत्तीसगढ़ और डॉ. राजेंद्र एम. पटेल, जिला विकास अधिकारी, वडोदरा, गुजरात ने भी दिये गये विषय क्षेत्र पर अपने अनुभव साझा किये।