भारत के सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय, रिश्वतखोरी अब संसदीय विशेषाधिकारों का कवच नहीं!

07 Mar, 2024
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Cash For Vote Case: 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिश्वतखोरी को संसदीय विशेषाधिकारों से बाहर कर दिया है।

इस निर्णय के तहत, संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को रिश्वतखोरी के मामलों में अभियोजन से छूट नहीं मिलेगी।

यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विश्लेषण:

सर्वोच्च न्यायालय ने “नोट फॉर वोट” मामले में 1996 में दिए गए अपने फैसले को पलटते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। पहले के फैसले में कहा गया था कि रिश्वतखोरी, जो सदन के अंदर की कार्यवाही से जुड़ी हो, उसे संसदीय विशेषाधिकारों के तहत संरक्षण प्राप्त होगा।

नए फैसले में, न्यायालय ने कहा कि रिश्वतखोरी एक गंभीर अपराध है जो लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जनता के विश्वास को भी धोखा देता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि संसदीय विशेषाधिकारों का उद्देश्य सदस्यों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से करने में सक्षम बनाना है, न कि उन्हें रिश्वतखोरी जैसे अपराधों से बचाना।

प्रभाव:

इस फैसले का भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह सांसदों और विधायकों को अधिक जवाबदेह बनाएगा और उन्हें रिश्वत लेने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर करेगा। यह फैसले से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी जनता के प्रति जवाबदेही को भी मजबूत करेगा।

निष्कर्ष:

सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह लोकतंत्र को मजबूत करने और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अतिरिक्त जानकारी:

यह फैसला एक याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया गया था।
इस याचिका में कहा गया था कि रिश्वतखोरी को संसदीय विशेषाधिकारों से बाहर किया जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और रिश्वतखोरी को संसदीय विशेषाधिकारों से बाहर करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Sandeep upadhyay