Breaking news

सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शामिल गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने पंजाब के कानून मंत्री और DGP को दी चेतावनी

Madrasa Survey: उत्तराखंड में भी होगा मदरसों का सर्वे, CM पुष्कर सिंह धामी ने बताया जरुरी ! Delhi News: जल्द होगा MCD Election की तारीख का ऐलान, वार्डों के प्रस्तावित नक्शे पर कमेटी ने मांगे सुझाव पश्चिम बंगाल में नबान्न अभियान को लेकर BJP और पुलिस आमने सामने, हिरासत में लिए गए शुभेंदु अधिकारी-लॉकेट चटर्जी Delhi News: AAP के दो विधायक दंगा भड़काने में दोषी करार, 7 साल पुराना है मामला; 21 सितम्बर को कोर्ट सुनाएगा सजा Mumbai News: शख्स की कार में लगी आग तो मदद के लिए आगे आए महाराष्ट्र CM एकनाथ शिंदे, रुकवाया काफिला

3 पूर्व SC जजों समेत 12 लोगों ने चीफ जस्टिस को भेजा याचिका पत्र, कहा- यूपी में बुलडोजर-गिरफ्तारी पर एक्शन लें

14 Jun, 2022
Sachin
Share on :

चिट्ठी पर दस्तखत करने वालों में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी, वी गोपाला गौड़ा, ए के गांगुली के अलावा 3 पूर्व हाई कोर्ट जज और शांति भूषण, इंदिरा जय सिंह जैसे वरिष्ठ वकील शामिल हैं.

नई दिल्ली: यूपी में पुलिस और प्रशासन बुलडोजर से दमनकारी कार्रवाई कर रही इसको लेकर बहुत से कानून के जानकार असंवैधानिक मान रहे हैं. इसी कार्रवाई को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के पूर्व जजों व वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में अदालत से पुलिस व प्रशासन की प्रताड़ना और साथ ही मौलिक अधिकारों का हनन करने पर स्वत: संज्ञान लेने की गुहार लगाई गई है. पत्र में सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश में नागरिकों पर राज्य के अधिकारियों द्वारा हाल ही में हुई हिंसा और दमन की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया गया है. इस पत्र में लिखा है कि भाजपा प्रवक्ता द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर की गई हालिया टिप्पणी  से  देश के कई हिस्सों में और विशेष रूप से यूपी में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. प्रदर्शनकारियों को सुनने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का मौका देने के बजाय, यूपी राज्य प्रशासन ने ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करने की मंज़ूरी दे दी है.

वही पूर्व जजों ने इस ओर भी ध्यानाकर्षित करा रहे है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया है जो एक उदाहरण स्थापित करे ताकि कोई भी ऐसा अपराध न करे या भविष्य में कानून अपने हाथ में न ले. उन्होंने आगे निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, और उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियों  (रोकथाम) अधिनियम 1986, को  दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ लागू किया जाए. इन्हीं टिप्पणियों ने पुलिस को प्रदर्शनकारियों को बेरहमी और गैरकानूनी तरीके से प्रताड़ित करने के लिए प्रोत्साहित किया है. पुलिस के ओर से बताया जा रहा है कि  इसके तहत यूपी पुलिस ने 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और विरोध कर रहे नागरिकों के खिलाफ FIR दर्ज की है.

पूर्व जजों ने प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया कि योगी जी ने ही अधिकारियों को ऐसी कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित किया

और यह भी पढ़ें- कोविड-19 जांच में पॉजिटिव पाए जाने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के स्वास्थ्य में हो रहा है सुधार

पत्र याचिका भेजने वाले लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि उसने पेगासस जासूसी जैसे नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई कर ज़रूरी आदेश दिए. उसी तरह उसे उत्तर प्रदेश में किए जा रहे नागरिकों के दमन पर भी तुरंत सुनवाई करनी चाहिए.

चिट्ठी पर इन 12 लोगों के हस्ताक्षर हैं. वह इस प्रकार हैं1. जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी, पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट 2. जस्टिस वी. गोपाला गौड़ा, पूर्व जज,सुप्रीम कोर्ट3. जस्टिस ए. के. गांगुली, पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट4. जस्टिस ए. पी. शाह, पूर्व चीफ जस्टिस, दिल्ली हाई कोर्ट5. जस्टिस के. चन्द्रू, पूर्व जज, मद्रास हाई कोर्ट6. जस्टिस मोहम्मद अनवर, पूर्व जज, कर्नाटक हाई कोर्ट7. शांति भूषण, वरिष्ठ वकील8. इंदिरा जयसिंह, वरिष्ठ वकील9. चंदर उदय सिंह, वरिष्ठ वकील10. श्रीराम पंचू, वरिष्ठ वकील11. प्रशांत भूषण, वकील12. आनंद ग्रोवर, वरिष्ठ वकील

Edited BY: Deshhit News

News
More stories
पीएम मोदी ने पुणे में तुकाराम महाराज मंदिर का किया उद्घाटन, बोले- आज हम विकास और विरासत को साथ लेकर चल रहे हैं