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युवाओं के प्रेरणास्रोत, युग प्रवर्तक, भारत के गौरव स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उनके 10 अनमोल विचार

04 Jul, 2022
Sachin
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शिकागो के भाषण में उन्हें मात्र 2 मिनट का समय दिया गया था किन्तु उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण का आरम्भ मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों के साथ करने के लिये जाना जाता है. उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने  सभा में बैठे सबका दिल जीत लिया था.

नई दिल्ली: वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद उनका जिनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था. उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था. इस भाषण को भारत के इतिहास में एतिहासिक माना जाता है. माना जाता है कि भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा है. उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है. वे रामकृष्ण परमहंस के सबसे परिपूर्ण सुयोग्य शिष्य थे.

शिकागो के भाषण में उन्हें मात्र 2 मिनट का समय दिया गया था किन्तु उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण का आरम्भ मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों के साथ करने के लिये जाना जाता है. उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने  सभा में बैठे सबका दिल जीत लिया था. विवेकानन्द ने संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धान्तों का प्रसार किया और कई सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया. भारत में विवेकानन्द को एक देशभक्त सन्यासी के रूप में माना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.   

कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानन्द आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे. उन्होंने अपने गुरु से सीखा कि सारे जीवो मे स्वयं परमात्मा का ही अस्तित्व है. इसलिए मानव जाति की जो मनुष्य दूसरे जरूरतमन्दों की मदद करता है वह परमात्मा की सेवा करता है. रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानन्द ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा की और ब्रिटिश भारत में तत्कालीन स्थितियों का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त किया.

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं स्वामी विवेकानंद

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लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना

एक बार स्वामी विवेकानन्द अपने आश्रम में सो रहे थे. उस दौरान एक व्यक्ति उनके पास आया जो कि बहुत दुखी था और आते ही स्वामी विवेकानन्द के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मैं अपने जीवन में खूब मेहनत करता हूँ हर काम खूब मन लगाकर भी करता हूँ फिर भी आज तक मैं कभी सफल नहीं हो पाया हूँ. उस व्यक्ति कि बाते सुनकर स्वामी विवेकानंद ने कहा ठीक है. आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ी देर तक घुमाकर लाये तब तक मैं आपकी समस्या का समाधान ढूँढ़ता हूँ. इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चला गया. और फिर कुछ समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस आया, तो स्वामी विवेकानन्द ने उस व्यक्ति से पूछा की यह कुत्ता इतना हाँफ क्यों रहा है. जबकि तुम थोड़े से भी थके हुए नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ?

नारी का सम्मान

स्वामी विवेकानन्द की ख्याति देश-विदेश में फैली हुई थी. एक बार कि बात है जब विवेकानन्द समारोह के लिए विदेश गए थे. और उनके समारोह में बहुत से विदेशी लोग आये हुए थे! उन्होंने अपनी स्पीच से एक विदेशी महिला को बहुत ही प्रभावित कर दिया था और जिसके बाद वह महिला विवेकानन्द के पास आयी और स्वामी विवेकानन्द से बोली कि मैं आपसे विवाह करना चाहती हूँ ताकि आपके जैसा ही मुझे गौरवशाली पुत्र की प्राप्ति हो. इसपर स्वामी विवेकानन्द बोले कि क्या आप जानती है कि मैं एक सन्यासी हूँ भला मैं कैसे विवाह कर सकता हूँ. यदि आप चाहो तो मुझे आप अपना पुत्र बना लो. इससे मेरा सन्यास भी नहीं टूटेगा और आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा. यह बात सुनते ही वह विदेशी महिला स्वामी विवेकानन्द के चरणों में गिर पड़ी और बोली कि आप धन्य है. आप ईश्वर के समान है! जो किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होता है.

स्वामी विवेकानंद का कथन बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं.

इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि मैं तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ पड़ता. जिसके कारण यह इतना थक गया है. इसपर स्वामी विवेकानन्द ने मुस्कुराते हुए कहा कि बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है. तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है. लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते रहते हो इसलिए तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पाए. यह बात सुनकर उस व्यक्ति को समझ में आ गया था कि यदि सफल होना है तो हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए.

मानवता के लिए स्वामी विवेकानंद जी के सन्देश

  1. एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ.
  2. सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चा होना। स्वयं पर विश्वास करो.
  3. किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या न आए, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं.
  4. जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे, यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे, अगर खुद को ताकतवर सोचते हो तुम ताकतवर हो जाओगे.
  5. तुम फुटबॉल के जरिए स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे बजाए गीता का अध्ययन करने के.
  6. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं, वो हमीं हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है.
  7. हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं. वे दूर तक यात्रा करते हैं.
  8. बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं.
  9. उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए.
  10. एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो, उसे बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो. अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो. यही सफल होने का तरीका है.

Edited By: Deshhit News

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