₹1.44 लाख करोड़ के पानी पर मचा घमासान: राजस्थान-पंजाब सरकार आमने-सामने, कोर्ट तक पहुंचेगा विवाद

24 Mar, 2026
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Punjab Rajasthan dispute: राजस्थान और पंजाब के बीच पानी को लेकर विवाद सोमवार को खुलकर सामने आ गया है। ₹1.44 लाख करोड़ के बकाया दावे ने दोनों राज्य सरकारों के रिश्तों में तल्खी बढ़ा दी है। पंजाब सरकार जहां इसे अपना अधिकार बता रही है, वहीं राजस्थान ने इस मांग को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित करार दिया है। इस मुद्दे ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल को गर्माया है, बल्कि कानूनी लड़ाई का संकेत भी दे दिया है।

सिन्धु नदी विवाद पर पंजाब-राजस्थान आमने सामने
सिन्धु नदी विवाद पर पंजाब-राजस्थान आमने सामने

कोर्ट जाने की तैयारी में पंजाब सरकार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को साफ कर दिया है कि उनकी सरकार अपने अधिकार के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि जब चोरी पकड़ी जाती है, तो शुरुआत में हर कोई इनकार करता है, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आ ही जाती है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब अपने हक को पाने के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ेगा और राजस्थान को भी अदालत में अपनी बात रखनी चाहिए।

राजस्थान सरकार का पलटवार: ‘रॉयल्टी का सवाल ही नहीं उठता’

राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे आगामी चुनावों से जोड़ते हुए राजनीतिक स्टंट करार दिया। रावत ने स्पष्ट कहा कि सतलुज नदी के पानी पर किसी भी प्रकार की रॉयल्टी देने का कोई प्रावधान नहीं है और ऐसी मांग पूरी तरह अनुचित है।

रावत ने दिया इतिहास और समझौतों का हवाला

राजस्थान मंत्री सुरेश सिंह रावत
राजस्थान मंत्री सुरेश सिंह रावत

मंत्री रावत ने बताया कि सतलुज नदी को लेकर 1920 के दशक में बीकानेर रियासत और पंजाब के बीच समझौते हुए थे, जो ब्रिटिश शासन के दौरान हुए थे। स्वतंत्रता के बाद केंद्र सरकार की मौजूदगी में कई बार बातचीत और समझौते हुए, लेकिन कहीं भी पानी पर रॉयल्टी का उल्लेख नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि परियोजनाओं की लागत साझा करना समझ में आता है, लेकिन प्राकृतिक संसाधन जैसे पानी पर रॉयल्टी मांगना तर्कसंगत नहीं है।

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल, हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने दावा किया था कि राजस्थान पर पानी के एवज में ₹1.44 लाख करोड़ बकाया है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि या तो यह राशि चुकाई जाए या फिर राजस्थान पानी लेना बंद कर दे।
मान ने आरोप लगाया कि 1960 के समझौते में भुगतान का जिक्र नहीं किया गया, जबकि 1920 के समझौते को रद्द भी नहीं किया गया। ऐसे में राजस्थान पुराने समझौते के आधार पर पानी लेता है, लेकिन भुगतान के सवाल पर नए समझौते का हवाला देता है।

आगे क्या होगा?

दोनों राज्यों के बीच बढ़ती बयानबाजी और कानूनी लड़ाई की तैयारी ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत में यह मामला किस दिशा में जाता है और कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।